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HIGH COURT TYPING CLASSES (DEWAS) Mob- 7415339871.

created Thursday November 25, 16:16 by Azhar Qureshi


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वादी 'अ' ने प्रतिवादी 'ब' के विरुद्ध कृषि भूमि माप- 10गुणा100 वर्ग गज (इसके उपरांत जिसे वादग्रस्‍त भूमि कहा जायेगा) जो कि, वादी की कृषि भूमि खसरा नं.-213 का भाग है, का आधिपत्‍य प्राप्‍त करने के लिये दावा प्रस्‍तुत किया गया है। वादी की वादग्रस्‍त भूमि खसरा नं.- 213, पूर्व में स्थित खसरा नं.- 212 से लगी हुई है, जो प्रतिवादी ''ब'' के स्‍वामित्‍व की है। प्रतिवादी 'ब' ने उसकी (वादी 'अ' की) भूमि ख.नं.- 213 के 10गुणा100 वर्ग गज भाग, का अवैध आधिपत्‍य प्राप्‍त कर लिया। प्रतिवादी 'ब' ने वादग्रस्‍त भूमि के सहित उसकी भूमि ख.नं.- 211 तथा 212 के चारों ओर कटीलें तार की फेंसिंग बना ली है। प्रतिवादी 'ब' ने वादग्रस्‍त भूमि में एक कुआं भी, वादग्रस्‍त भूमि और ख.नं.- 211 तथा 212 की भूमि पर सिंचाई के लिए खोदा है। वादी ने भूमि ख.नं.- 212 तथा 213 की सीमांकन कराया और उसके द्वारा यह निश्चित किया गया है कि, प्रतिवादी 'ब' ने वादी की वादग्रस्‍त भूमि पर अतिक्रमण किया हुआ है। वादी ने वादग्रस्‍त भूमि रिक्‍त करने हेतु प्रतिवादी 'ब' को कानूनी सूचना पत्र भेजा किंतु 'ब' ने उसका विरोध किया और वादग्रस्‍त भूमि रिक्‍त करने से इन्‍कार कर दिया। प्रतिवादी ने जवाब दावा प्रस्‍तुत किया और यह बचाव किया कि ख.नं.- 212 माप 2.50 एकड़ की भूमि क्रय करने के पश्‍चात् 'ब' ने ख.नं- 211 तथा 212 की भूमि के चारों ओर कटीले तारों से घेरी वादग्रस्‍त भूमि ख.नं.- 212 का हिस्‍सा है, जो विक्रेता 'स' ने उसे पंजीकृत विक्रय पत्र द्वारा विक्रय किया है। वह वादग्रस्‍त भूमि का अतिक्रमणकारी नहीं है, बल्कि बगैर जानकारी के, वादग्रस्‍त भूमि वादी के स्‍वामित्‍व की भूमि ख.नं.-213 का हिस्‍सा है, उसके द्वारा उचित मूल्‍य देकर सद्भाविक क्रय किया गया है। विकल्‍प में, प्रतिवादी 'ब' ने यह भी प्रकथन किया है कि, यदि वादी यह प्रमाणित करने में सफल हो जाता है कि, वादग्रस्‍त भूमि ख.नं.- 213 का भाग है, उस स्थिति में वादी को निर्देश दिया जावे कि वह प्रतिवादी को उसके द्वारा विवादग्रस्‍त भूमि में की गई ''उन्‍नति'' का मूल्‍य प्रदान करके क्षतिपूर्ति करे अथवा वादग्रस्‍त भूमि उसे विक्रय कर दें।  

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