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BUDDHA ACADEMY TIKAMGARH (MP) || ☺ || ༺•|✤कोरोना वायरस✤|•༻ {संचालक बुद्ध अकादमी टीकमगढ़}

created Feb 8th, 05:44 by Anshul Sen


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पिछले साल के आखिरी महीने में मध्‍य चीन के वुहान शहर में वायरल निमोनिया की एक अज्ञात किस्‍म ने लोगों को संक्रमित करना शुरू किया। कुछ ही सप्‍ताह बाद विश्‍व स्‍वास्‍थ्‍य संगठन और चीन के स्‍वास्‍थ्‍य अधिकारियों ने एक नए किस्‍म के कोरोना वायरस का पता लगाने की घोषणा की और पाया गया कि यही वायरस निमोनिया के लिए जिम्‍मेदार है। यह संक्रमण बड़ी तेजी से, बल्कि अभूतपूर्व ढंग से फैला और उसकी जो प्रतिक्रिया हुई, वह भी उतीन ही अभूतपूर्व थी। तेजी से फैल रही इस महामारी को लेकर दो सवाल तुरंत उठे। पहला, यह रोग कितना जानलेवा है। और दूसरा, क्‍या इसको नियंत्रित किया जा सकता है। ताजा आंकड़े बता रहे हैं कि इसने अभी तक तीन सौ से ज्‍यादा लोगों की जान ले ली है और इससे संक्रमित होने वालों की संख्‍या हजारों में है। इस रोग की वजह से मृत्‍यु-दर का ताजा आकलन दो फीसदी का है, जैसे-जैसे इसके नए मामले सामने आएंगे, यह आंकड़ा कम हो सकता है।
    इस रोग को नियंत्रित करने की कोशिशें देरी से शुरू हुईं, लेकिन चीन ने जिस बड़े पैमाने पर ये कोशिशें की इससे पहले वैसे प्रयास कभी नहीं हुए। 23 जनवरी को चीन ने वहुान समेत बारह शहरों को देश के शेष भाग से काट दिया। सिर्फ एक फैसले के जरिए करोड़ों लोगों के आस-पास स्‍वास्‍थ्‍य सुरक्षा का घेरा बना दिया गया। आधुनिक इतिहास में यह शायद पहला उदाहरण है, जब किसी पूरे शहर के दरवाजे इस तरह से बंद कर दिए गए हों। लेकिन तब तक यह वायरस हांगकांग, मकाऊ, ताईवान, थाईलैंड, दक्षिण कोरिया, जापान, सिंगापुर, ऑस्‍ट्रेलिया और अमेरिका तक फैल चुका था। भारत के केरल में कोरोना वायरस का पहला मामला वुहान विश्‍वविद्यालय में पढ़ने गए एक छात्र में देखने को मिला और इसके बाद केरल में ही इसके दो मामले सामने चुके हैं। कई देशों ने चीन से आने वाले लोगों पर पूरी या आंशिक पाबंदी लगा दी है।
    इस सदी में फैले दो ऐसे रोगों को देखें, तो इसे नियंत्रित करने के तरीकों को लेकर हम काफी कुछ समझ सकते हैं। इस सदी की शुरुआत में चीन में ही सार्स का संक्रमण फैला था, जिसे नियंत्रित करने में नौ महीने का समय लग गया था। इसी तरह हम मैक्सिको से शुरू हुए एच1 एन1 इन्‍फ्लुएंजा को देख सकते हैं। एच1एन1 के मामले में जहां मृत्‍यु-दर 0.1 फीसदी थी, वहीं सार्स के मामले में यह 10 फीसदी थी। मौजूदा कोरोना वायरस की एक महत्‍वपूर्ण बात यह है कि इसका संक्रमण तब भी फैल सकता है, जब किसी मरीज में इसके लक्षण बिल्‍कुल दिखाई दे रहे हो। इसके कारण इसे नियंत्रित करना और भी मुश्किल हो जाता है।  
    कोरोना वायरस की संरचना मूठ लगी हुई तीलियों जैसी होती है। इसमें एक काफी बड़ा आरएनए जीनोम होता है, जिसकी अपने जैसे नए वायरस बनाने की रणनीति अनूठी होती है। यह पक्षियों से लेकर स्‍तनधारी जंतुओं तक को कई तरह से रोग देता है इौर इंसानों की श्‍वास नली को संक्रामित कर देता है।

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