Text Practice Mode
Malti Computer Center Tikamgarh CPCT
created Today, 02:11 by MCC21
0
532 words
5 completed
0
Rating visible after 3 or more votes
saving score / loading statistics ...
00:00
किताबें ज्ञान का सागर होती है कई बार ये हमारे विषय होते हैं जैसे की विज्ञान गणित भूगोल गणित आदि। आप अपनी जरुरत के अनुसार कोई भी विषय चुन सकते हैं। जरुरी नहीं कि ये आपके शैक्षिक अभिलेख से संबंधित हो कई बार लोग अपने ज्ञान को बढाने हेतु कई किताबें पढते हैं। किताब ज्ञान के साधन के साथ साथ मनोरंजन का भी साधन होती हैं। कुछ किताबें आपको हंसा सकती हैं तो वहीं कुछ अपनी करुण कहानियों के साथ आपको रुला भी सकती हैं। देखा जाये जो किताबों की मौजूदगी का सबूत हमारे वेद और पुराण देते हैं लेकिन इनका सही मायनों में विकास कई सालों बाद हुआ। किताबों का उपयोग हम ज्ञान के संग्रहण के लिये करते हैं। पहले के जमाने में लोग मौखिक रूप से शिक्षा लिया करते थे। गुरु अपने गुरुओं से जो ज्ञान अर्जित करते थे वही अपने छात्रों को प्रदान दिया करते थे। परंतु यह तो तय ही था की इस प्रकार कुछ न कुछ ज्ञान छूट ही जाया करता होगा। फिर कागज की खोज के बाद लोग अपनी कक्षा में सीखी गयी बातों को लिख लिया करते थे और शायद यही वजह है कि आगे चल कर हमे अपने इतिहास की जानकारी आसानी से मिल पाई। आप चाहे जिस क्षेत्र में जाए वे किताबे ही हैं जो आपके सही साथी के रूप में हर जगह काम आयेंगी। हम विकास कैसे करते हैं इन किताबों से जान सकते हैं। जब हमे पता होगा की अ और ब को मिलाने से अब बनता है तभी न हम आगे की रचना कर पाएगे। नहीं तो हर नए युग के साथ नयी भाषा की ही खोज करते रह जायेंगे। प्राचीन समय में पत्रों पर लिखा गया वह धीरे धीरे कागज में परिवर्तित हो गया और उसी परिवर्तित रूप का उपयोग आज हम कागजों के रूप मेंलिखने एवं पढने दोनों के लिये करते हैं। जो पहले हाथों से लिखित रूप में था वह अब धीरे धीरे प्रिंटिंग प्रेस की खोज के बाद मुद्रित रूप में है। किताबें आपका साथ कभी नहीं छोडती। कई बार आपने खुद को अकेला पाया होगा और कभी कभी ऐसे समय में हमारे परम मित्र भी साथ नहीं होते। लेकिन किताबें सदैव आपके साथ रह सकती है। उनके रहते न तो आपको अकेलापन महसूस होता है और न ही वे कभी आपको धोका देती हैं। कभी वे अपनी मजेदार कहानियों से आपको गुदगुदाती हैं तो कभी कथानायक की पीडा आपकी आंखों में आसूं ला देती है। एक बार अगर आपने किताब को अपने साथी के रूप में चुन लिया तो उसके बाद न तो कभी आपको अकेलापन सताता है और न ही किसी के समय अनुसार आपको समायोजित होना पडता है। इस प्रकार हम यह कह सकते हैं की किताब आपके सुविज्ञ साथी होती हैं। उनका विकास समय के अनुसार होता चला गया और दिन प्रति दिन नए नए विकास होते चले जा रहे हैं जैसे कि अब आप ऑनलाइन भी किताब पढ सकते हैं। चाहे वे बालकों की पंचतंत्र की कहानियां हो या आचार्य भारत का नाटकशास्त्र। सब कुछ ऑनलाइन मिल जाता हैं और आप आराम से पढ सकते हैं। इनकी खासियत यह होती है कि ये खराब नहीं होते और इन को आसानी से अपने फोन में भी सुरक्षित रखा जा सकता है।
saving score / loading statistics ...