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Malti Computer Center Tikamgarh MP ASI Steno
created Today, 03:15 by Ram999
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स्वच्छता किसी भी समाज के समग्र विकास का एक महत्वपूर्ण आधार मानी जाती है। स्वच्छ वातावरण न केवल शारीरिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाता है, बल्कि मानसिक संतुलन बनाए रखने में भी सहायक होता है। जब आसपास का वातावरण साफ रहता है, तो संक्रामक रोगों के फैलने की संभावना कम हो जाती है। इसी कारण सरकार द्वारा समय-समय पर स्वच्छता से संबंधित विभिन्न कार्यक्रम संचालित किए जाते हैं।
नगरों एवं ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छता बनाए रखना सामूहिक जिम्मेदारी है। खुले में कचरा फेंकना, नालियों को अवरुद्ध करना तथा सार्वजनिक स्थानों को गंदा करना जनस्वास्थ्य के लिए हानिकारक होता है। ऐसे वातावरण में मच्छर, मक्खियां तथा अन्य रोग फैलाने वाले जीव पनपते हैं, जिससे विभिन्न बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।
स्वच्छ जल की उपलब्धता जनस्वास्थ्य का एक प्रमुख आधार है। दूषित जल के सेवन से हैजा, पीलिया, टायफाइड जैसी गंभीर बीमारियां उत्पन्न हो सकती हैं। इसलिए जल स्रोतों की नियमित सफाई एवं संरक्षण आवश्यक है। जल आपूर्ति से संबंधित व्यवस्थाओं की निरंतर निगरानी से अनेक समस्याओं से बचा जा सकता है।
सरकार द्वारा स्वच्छता जागरूकता के लिए अभियान चलाए जाते हैं, जिनका उद्देश्य नागरिकों को स्वच्छ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करना होता है। व्यक्तिगत स्वच्छता जैसे हाथ धोना, साफ कपड़े पहनना तथा भोजन से पूर्व स्वच्छता का ध्यान रखना स्वास्थ्य की दृष्टि से अत्यंत आवश्यक है।
स्वच्छता केवल एक आदत नहीं बल्कि सामाजिक उत्तरदायित्व है। जब प्रत्येक नागरिक इस दायित्व को समझता है, तब ही स्वच्छ और स्वस्थ समाज की कल्पना साकार हो सकती है। स्वच्छ वातावरण से जीवन की गुणवत्ता में सुधार होता है तथा स्वास्थ्य संबंधी व्यय में भी कमी आती है।
नगरों एवं ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छता बनाए रखना सामूहिक जिम्मेदारी है। खुले में कचरा फेंकना, नालियों को अवरुद्ध करना तथा सार्वजनिक स्थानों को गंदा करना जनस्वास्थ्य के लिए हानिकारक होता है। ऐसे वातावरण में मच्छर, मक्खियां तथा अन्य रोग फैलाने वाले जीव पनपते हैं, जिससे विभिन्न बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।
स्वच्छ जल की उपलब्धता जनस्वास्थ्य का एक प्रमुख आधार है। दूषित जल के सेवन से हैजा, पीलिया, टायफाइड जैसी गंभीर बीमारियां उत्पन्न हो सकती हैं। इसलिए जल स्रोतों की नियमित सफाई एवं संरक्षण आवश्यक है। जल आपूर्ति से संबंधित व्यवस्थाओं की निरंतर निगरानी से अनेक समस्याओं से बचा जा सकता है।
सरकार द्वारा स्वच्छता जागरूकता के लिए अभियान चलाए जाते हैं, जिनका उद्देश्य नागरिकों को स्वच्छ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करना होता है। व्यक्तिगत स्वच्छता जैसे हाथ धोना, साफ कपड़े पहनना तथा भोजन से पूर्व स्वच्छता का ध्यान रखना स्वास्थ्य की दृष्टि से अत्यंत आवश्यक है।
स्वच्छता केवल एक आदत नहीं बल्कि सामाजिक उत्तरदायित्व है। जब प्रत्येक नागरिक इस दायित्व को समझता है, तब ही स्वच्छ और स्वस्थ समाज की कल्पना साकार हो सकती है। स्वच्छ वातावरण से जीवन की गुणवत्ता में सुधार होता है तथा स्वास्थ्य संबंधी व्यय में भी कमी आती है।
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