eng
competition

Text Practice Mode

साँई कम्‍प्‍यूटर टायपिंग इंस्‍टीट्यूट गुलाबरा छिन्‍दवाड़ा (म0प्र0) संचालक:- लकी श्रीवात्री मो0नां. 9098909565

created Today, 06:42 by lucky shrivatri


0


Rating

355 words
123 completed
00:00
तमाम सख्‍ती के बावजूद कफ सिरप में जहरीले रसायन के इस्‍तेमाल से बच्‍चों की जान जा रही हो तो चिंता होना स्‍वाभाविक है। मध्‍यप्रदेश, राजस्‍थान और उत्तरप्रदेश में पिछले दिनों ऐसे कई मामले सामने आए थे जिनमें कफ सिरप में जहर ने बच्‍चों को मौत की नींद में सुला दिया था। खतरनाक पहलू यह है कि तीन महीने पहले छिंदवाड़ा और बैतूल में जिस कफ सिरप के सेवन से दो दर्जन से ज्‍यादा बच्‍चों की मौत हो गई थी, उसी कंपोजिशन की सिरप मध्‍यप्रदेश में लगातार बिकती रही। इस सिरप में इंडस्ट्रियल केमिकल एथलीन ग्‍लायकॉल मिला है जो कोल्ड्रिफ कफ सिरप में भी पाया गया था।  
लापरवाही का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि गाडियों के इंजन को ठंडा रखने वाले कूलेंट में इस्‍तेमाल होने वाला केमिकल मिला सिरप पूरे प्रदेश में बिकता रहा। तेलंगाना सरकार ने अपने यहां बैन लगाने का नोटिस राज्‍यों को भेजा, तब जाकर मध्‍यप्रदेश में इसकी बिक्री पर रोक लगाई गई। मुद्दे की बात यह है कि बच्‍चों की मौत के बाद भी ऐसी दवाओं पर तुरंत पाबंदी क्‍यों नहीं लगाई गई? क्‍या जिम्‍मेदारों की नजर में मासूमों की जान की कोई कीमत नहीं है। पिछले साल पूरे देश में दर्जनों कफ सिरप में जहरीले रसायन पाए गए, जिनसे मुख्‍य रूप से बच्‍चों और कुछ बड़ों की मोत हुई। मध्‍यप्रदेश में सबसे ज्‍यादा मौते दर्ज हुई, जहां एक ही दवा से दो दर्जन से ज्‍यादा बच्‍चे मारे गए। राजस्‍थान और उत्तर प्रदेश में भी ऐसे मामले उजागर हुए, लेकिन कार्रवाई नाममात्र की रही। कंपनियां बंद की गई, कुछ फार्मा कंपनियों के मालिको को गिरफ्तार किया गया लेकिन सिस्‍टम में कोई बड़ा बदलाव नहीं आया। सवाल है कि जांच में सब कुछ पता चलने के बावजूद कंपनियों पर स्‍थायी कार्रवाई क्‍यों नहीं होती। कुछ दिन के दिखावे के बाद वहीं कंपनियां फिर दवाओं की आपूर्ति शुरू कर देती है। आखिर राज्‍य के दवा नियंत्रक इन पर लगाम क्‍यों नहीं लगा पा रहे। सरकार की तरफ से भी प्रभावी कार्रवाई की कमी दिखती है। हाल ही सर्वोच्‍च न्‍यायालय में इस पर जनहित याचिका दायर हुई, जिसमें केंद्रीय जांच की मांग की गई लेकिन अदालत ने इसे खारिज कर दिया।  
 
 
 
 
 
 
 
 
 

saving score / loading statistics ...