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साँई कम्‍प्‍यूटर टायपिंग इंस्‍टीट्यूट गुलाबरा छिन्‍दवाड़ा (म0प्र0) सीपीसीटी न्‍यू बैच प्रारंभ संचालक- लकी श्रीवात्री मो. नं. 9098909565

created Jan 15th, 05:58 by lucky shrivatri


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एक गुरूकुल था। वहां पर सभी शिष्‍य अनुशासन से रहते थे। पढ़ते थे और तरह-तरह के खेल भी खेलते थे। गुरूकुल में एक दिन चर्चा के दौरान गुरू सत्‍येंद्र नाथ अपने शिष्‍यों को बता रहे थे कि छोत्रों यह जीवन एक अनोखा चित्र है। इस जीवन में तीन चीजें बहुत उलझी होती है, दिल, दिमाग और किस्‍मत। दिल कुछ चाहता है। फिर दिमाग उसे पाने के लिए रास्‍ता तलाश करता है, पर होता वही है जो तकदीर में लिखा होता है। सुबोध नामक युवक को यह समझ नहीं रही थी। गुरूजी उसे एक फलदार बगीचे में लेकर गए। वहां पर एक बंदर जामुन के पेड़ पर चढ़ाई करना चाहता था, लेकिन बागबान का मोटा डंडा उसे कुछ भी नहीं करने दे रहा था। एकाध बार उसने प्रयास किया मगर विफल रहा। भूख बढ़ती जा रही थी। तभी उस बगीचे में एक बुजुर्ग केले का गुच्‍छा लेकर आए और बंदर के सामने रख दिया। बंदर की खुशी का पारावार था। उसने खुशी-खुशी हाथ आगे बढ़कर और छीलकर, छक, कर, गरदन हिलाकर केले खाए। यह प्रत्‍यक्ष प्रमाण देखकर सुबोध ने गुरूजी की बात को स्‍वीकार किया।  

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