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TRIVENI TYPING MANSAROVAR COMPLEX CHHINDWARA MOB-7089973746
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वह ट्रंप का रुख लचीला दिख रहा है। ऐसे मे बड़े तालाब किशोर सागर पर अवैध कब्जा कर कालोनी बसा लेने का विवाद आया। राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने 7 अगस्त, 2014 को किशोर सागर तालाब के मूल रकवा, भराव क्षेत्र और 10 मीटर के ग्रीन जोन को कब्जा मुक्त करने का आदेश दिया। सवाल अटक गया कि भराव क्षेत्र का निर्धारण कैसे हो? इस साल सावन में इतना पानी बरसा कि किशोर सागर के भीतर बसे मकानों में दस फुट तक पानी भर गया। एक झटके में तालाब ने बता दिया कि उसका अपना दायरा कहां तक है। अब भले ही समाज और मीडिया इसे बाढ़ कहे, किशोर सागर ने नैसर्गिक तरीके से अपना घर-पता दर्ज करवा दिया। सारे देश के हर गांव-कस्बे में छोटी नदियां हों, या पारंपरिक तालाब या फिर जोहड़, उन पर कब्जे हुए और अदालती लड़ाई में यह साबित करना टेढ़ी खीर हो गया कि अमुक जल-निधि का फैलाव कहां तक है? मानसून में इसका स्वाभाविक तरीका खुद-ब-खुद सामने दिख जाता है, बशर्ते उसे मापने-आंकने और दर्ज करने की इच्छाशक्ति हो। होगा कि जीएसटी में कमी का लोगों को महीनों से इंतजार है। तीसरी घोषणा उचित ही रोजगार को लेकर है। देश में रोजगार की मांग लगातार बढ़ रही है। ऐसे में, रोजगार योजना की घोषणा स्वागत-योग्य है। यदि यह योजना जमीन पर साकार हुई, तो देश में अगले दो वर्षों में 3.5 करोड़ नौकरियां पैदा हो सकती हैं। प्रधानमंत्री की चौथी घोषणा उच्च-स्तरीय जनसांख्यिकी मिशन शुरू करने की है। सीमावर्ती क्षेत्रों में घुसपैठ और अवैध प्रवास से निजात पाना जरूरी हो गया है। भारत सबसे ज्यादा आबादी वाला देश है और इसे अपनी भूमि पर किसी भी प्रकार के जनसांख्यिकीय असंतुलन से बचना चाहिए। प्रधानमंत्री की पांचवीं घोषणा भी बहुत कारगर है। साल 2047 तक देश की परमाणु ऊर्जा क्षमता को दस गुना तक
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