eng
competition

Text Practice Mode

CPCT CENTER जिला पंचायत उमरिया (म.प्र.) संपर्क:- 9301406862

created Yesterday, 10:00 by R PATEL


1


Rating

306 words
110 completed
00:00
हरिवंश राय बच्‍चन की ''मधुशाला'' जीकन, प्रेम, संघर्ष और समाज का गहरा रूपक है, जहॉं मधुशाला शराबखाना नहीं, बल्कि जीवन का  प्रतीक है; 'हाला' जीवन का नशा या अनुभव, 'साकी' कवि या नियति, और 'प्‍याला' मनुष्‍य है, जो जीवन के सुख-दुख, प्रेम-विरह को पीकर एकता, समानता और सकातरात्‍मकता का संदेश देता है, जिसमें धर्म-जाति का भेद मिट जाता है और जीवन को उत्‍सव की तरह जीने की प्रेरणा मिलती है।
जीवन एक यात्रा:- जीवन को एक निरंतर बहती धारा(मदिरा) के रूप में दिखाया गया है, जिसे हर व्‍यक्ति पी रहा है, और यह यात्रा सुख-दुख, सफलता-विफलता से भरी है।  
रूपकों का प्रयोग:- मधुशाला जीवन, दुनिया, या स्‍वयं कवि का हृदय/रचना संसार है। हाला जीवन का अनुभव, प्रेम, सुख, दुख या वास्तिविकता है। साकी कवि (जो रचना परोसता है) या नियति/ईश्‍वर। प्‍याला मनुष्‍य या पाठक, जो जीवन के अनुभवों (शराब) को ग्रहण करता है।  
सामाजिक समरसता:- 'मुसलमान और हिंदु हैं दो, एक मगर उनका प्‍याला' जैसी पंक्तियों से कवि ने धर्म और जातिगत भेदभाव मिटाकर सभी मनुष्‍यों की समानता और एकता का आह्वान किया गया है।  
सकारात्‍मक दृष्टिकोण:- कठिनाईयों और नश्‍वरता के बीच भी जीवन को उत्‍सव की तरह, हंसते-हंसते जीने का संदेश देती है।  
आध्‍यात्मिक/दार्शनिक अर्थ:- यह आत्‍मज्ञान और आत्‍मानुभूति की ओर इशारा करती है, जहॉं व्‍यक्ति जीवन के सार को समझकर मुक्ति पाता है, या सिर्फ जीवन के नशे में डूब जाता है।  
संक्षेप में, मधुशाला हरिवंश राय बच्‍चन की वह कालजयी रचना है, जो जीवन के हर पहलू को शराबखाने मधुशाला के रूपकों के माध्‍यम से प्रस्‍तुत करती है और मानवीय भावनाओं, संघर्षों तथा एकता एक गहरे दर्शन को उजागर करती है।  
आज समाज के समस्‍त क्रियाकलापों तथा जीवन की भागदौड़ में आदमी के द्वारा अपना सुकून एवं चैन को एक तरफ कर दिया गया है।  
क्‍या आप शब्‍द ''तरफ'' को बिना बैकस्‍पेश दबाये लिख सकते हैं? यदि हॉं तो लिख कर दिखायें।  

saving score / loading statistics ...