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धर्मवीर भारती का उपन्यास ''गुनाहों का देवता'' चंदर और सुधा की मार्मिक प्रेम कहानी है, जो इलाहाबाद की पृष्ठभूमि पर आधारित है, जहॉं चंदर, प्रो. शुक्ला के संरक्षण में रहकर पढ़ता है और उनकी बेटी सुधा से उसे गहरा प्रेम हो जाता है। लेकिन सामाजिक मर्यादा और नैतिक बंधनों के कारण वे एक नहीं हो पाते; अंतत: सुधा की शादी कहीं और हो जातीहै, जिससे चंदर और सुधा दोनों के जीवन भर भावनात्मक त्रासदी झेलते हैं, और यह कहानी प्रेम, कर्तव्य, बलिदान तथा सामाजिक रूढि़यों के टकराव को दर्शाती है।
चंदर:- एक गरीब लेकिन होनहार और आदर्शवादी युवक, जो प्रो. शुक्ला का शिष्य है।
सुधा:- प्रो. शुक्ला की बेटी, चंदर से प्रेम करने वाली एक मासूम और भावुक लड़की।
पम्मी:- कहानी का एक महत्वपूर्ण पात्र, जो चंदर के जीवन में आता है।
विनती:- सुधा की बुआ की लड़की, जो चंदर से भी प्रेम करती है।
चंदर, प्रो. शुक्ला के घर में रहकर पढ़ाई करता है, जहॉं उसका सुधा के साथ गहरा और निश्छल प्रेम-संबंध विकसित होता है।
दोनों एक-दूसरे से बहुत प्यार करते हैं, लेकिन चंदर अपनी उच्च नैतिकता और प्रो. शुक्ला के प्रति सम्मान के कारण अपने प्रेम को व्यक्त नहीं कर पाता।
सामाजिक दबाव और चंदर के अपने ही नेतिक द्वंद्व के कारण, सुधा की शादी किसी और से तय हो जाती है, जिसे चंदर ही हॉं कहलवाने में मदद करता है।
सुधा की सादी के बाद चंदर और सुधा दोनों ही जीवन भर उस प्रेम-वेदना और त्रासदी को भोगते हैं, जिसे लेखक 'गुनाहों का देवता' कहकर पुकारते हैं, जहॉं प्रेम को देवता मानकर उसकी बलि चढ़ा दी जाती है।
इस उपन्यास से हमें क्या सीख मिलती है ? क्या यह जीवन में प्रेम के विरह का एक कड़वा प्याला है! इसके प्रमुख विषय निम्न है:-
प्रेम, त्याग और बलिदान जो कि चंदर और सुधा के द्वारा किया गया ।
सामाजिक बंधन, जाति-पाति और आर्थिक विषमता जो उनकी शादी न होने का कारण बना ।
मानवीय अंतर्द्वंद्व और नैतिक मूल्यों का टकराव, जिसमें कुछ लोगों के द्वारा अपने प्रेम को मन में छुपाकर ही अंतर्मन में अपनी भावनओं का विनाश कर दिया जाता है।
चंदर:- एक गरीब लेकिन होनहार और आदर्शवादी युवक, जो प्रो. शुक्ला का शिष्य है।
सुधा:- प्रो. शुक्ला की बेटी, चंदर से प्रेम करने वाली एक मासूम और भावुक लड़की।
पम्मी:- कहानी का एक महत्वपूर्ण पात्र, जो चंदर के जीवन में आता है।
विनती:- सुधा की बुआ की लड़की, जो चंदर से भी प्रेम करती है।
चंदर, प्रो. शुक्ला के घर में रहकर पढ़ाई करता है, जहॉं उसका सुधा के साथ गहरा और निश्छल प्रेम-संबंध विकसित होता है।
दोनों एक-दूसरे से बहुत प्यार करते हैं, लेकिन चंदर अपनी उच्च नैतिकता और प्रो. शुक्ला के प्रति सम्मान के कारण अपने प्रेम को व्यक्त नहीं कर पाता।
सामाजिक दबाव और चंदर के अपने ही नेतिक द्वंद्व के कारण, सुधा की शादी किसी और से तय हो जाती है, जिसे चंदर ही हॉं कहलवाने में मदद करता है।
सुधा की सादी के बाद चंदर और सुधा दोनों ही जीवन भर उस प्रेम-वेदना और त्रासदी को भोगते हैं, जिसे लेखक 'गुनाहों का देवता' कहकर पुकारते हैं, जहॉं प्रेम को देवता मानकर उसकी बलि चढ़ा दी जाती है।
इस उपन्यास से हमें क्या सीख मिलती है ? क्या यह जीवन में प्रेम के विरह का एक कड़वा प्याला है! इसके प्रमुख विषय निम्न है:-
प्रेम, त्याग और बलिदान जो कि चंदर और सुधा के द्वारा किया गया ।
सामाजिक बंधन, जाति-पाति और आर्थिक विषमता जो उनकी शादी न होने का कारण बना ।
मानवीय अंतर्द्वंद्व और नैतिक मूल्यों का टकराव, जिसमें कुछ लोगों के द्वारा अपने प्रेम को मन में छुपाकर ही अंतर्मन में अपनी भावनओं का विनाश कर दिया जाता है।
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