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तारों की भाषा | ICON COMPUTER CHHINDWARA | GULABARA MAIN ROAD NEXT TO HOTEL SILVER SHINE.
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एक बड़े शहर में, जहाँ इमारतें बादलों को छूने की होड़ में लगी रहती थीं, वहाँ 'आकाश' नाम का एक लड़का रहता था। आकाश दूसरों से थोड़ा अलग था। उसे शोर-शराबे, भीड़-भाड़ और मोबाइल फोन की अंतहीन नोटिफिकेशन में कोई दिलचस्पी नहीं थी। उसे पसंद थे तो बस पुराने पुल, शांत नुक्कड़ और सबसे ज़्यादा—रात के तारे।
शहर की तेज़ रोशनियों ने आसमानी कैनवस को फीका कर दिया था, लेकिन आकाश हर रात अपनी छत पर जाकर, बची-खुची टिमटिमाहट में ही अपनी दुनिया खोज लेता। लोग उसे अजीब समझते, पर उसे परवाह नहीं थी।
एक रात, जब वह अपने छोटे टेलीस्कोप से शनि के छल्लों को देखने की कोशिश कर रहा था, उसकी नज़र पास वाली छत पर पड़ी। वहाँ एक लड़की बैठी थी, हाथ में एक डायरी और पेन लिए, कुछ लिख रही थी। उसका नाम 'कियारा' था। कियारा एक मशहूर इन्फ्लुएंसर थी, जिसकी ज़िंदगी सोशल मीडिया पर चमकती थी, लेकिन असल में वह उस चकाचौंध से थक चुकी थी।
आकाश ने देखा कि कियारा भी ऊपर की तरफ देख रही थी, लेकिन उसकी आँखें उदास थीं। अगले कुछ दिनों तक यह सिलसिला चलता रहा। दोनों के बीच कोई बातचीत नहीं हुई, बस एक-दूसरे की मौजूदगी का अहसास था।
एक दिन, तेज़ बारिश के बाद, आसमान एकदम साफ़ था। तारे ज़्यादा चमकदार लग रहे थे। आकाश ने सोचा कि आज कियारा को कुछ ख़ास दिखाना चाहिए। उसने कागज़ के एक बड़े टुकड़े पर एक संदेश लिखा: "क्या तुमने वह तारा देखा?" और उसे अपनी छत की मुंडेर पर खड़ा कर दिया।
कियारा ने संदेश देखा और थोड़ा मुस्कुराई। उसने अपनी डायरी का एक पन्ना फाड़ा और लिखा: "कौन सा? यहाँ तो बहुत कम हैं।"
आकाश ने इशारे से उसे एक ख़ास दिशा में देखने को कहा, जहाँ 'ध्रुव तारा' चमक रहा था। कियारा ने अपने टेलीस्कोप से देखा, जो शायद उसने सिर्फ़ सजावट के लिए रखा था। उसने पहली बार उस तारे को इतनी शिद्दत से महसूस किया।
दोनों के बीच यह 'मूक संवाद' (silent communication) रोज़ होने लगा। वे संदेशों के ज़रिए एक-दूसरे को तारों, ग्रहों और अंतरिक्ष के रहस्यों के बारे में बताते। कियारा ने अपनी डिजिटल दुनिया छोड़कर, इस असली और शांत दुनिया में दिलचस्पी लेनी शुरू कर दी। उसने अपनी डायरी में लिखना शुरू किया कि कैसे शहर के शोर के ऊपर एक पूरी नई, शांत भाषा है—तारों की भाषा।
कुछ हफ़्तों बाद, एक दिन कियारा की छत पर एक पार्टी थी। बहुत शोर था, और आकाश अपनी छत पर अकेला था। पार्टी ख़त्म होने के बाद, जब सब जा चुके थे, कियारा आकाश की छत पर आई।
पहली बार वे आमने-सामने बात कर रहे थे।
"तुम्हारी दुनिया मेरी दुनिया से बहुत अलग है, आकाश," कियारा ने कहा। "यहाँ शांति है, जबकि मेरी ज़िंदगी में सिर्फ़ शोर था।"
आकाश ने जवाब दिया, "शोर में हम ख़ुद को खो देते हैं, कियारा। शांति में हम ख़ुद को पाते हैं। तारे हमें यही सिखाते हैं—अंधेरे में भी चमकना।"
उस रात, वे शहर की रोशनियों से दूर, तारों की छाँव में बैठे रहे। कियारा ने अपनी मशहूर 'ऑनलाइन' ज़िंदगी छोड़ दी और एक लेखिका बन गई, जो अंतरिक्ष और शांति के बारे में लिखती थी। आकाश का अकेलापन दूर हो गया, और उसे एक दोस्त मिल गई, जो उसकी दुनिया को समझती थी।
दोनों ने यह साबित कर दिया कि सच्चे रिश्ते ढूँढने के लिए कभी-कभी ज़मीन की चमक नहीं, बल्कि आसमान के अंधेरे और उसमें टिमटिमाते तारों को देखना पड़ता है।
शहर की तेज़ रोशनियों ने आसमानी कैनवस को फीका कर दिया था, लेकिन आकाश हर रात अपनी छत पर जाकर, बची-खुची टिमटिमाहट में ही अपनी दुनिया खोज लेता। लोग उसे अजीब समझते, पर उसे परवाह नहीं थी।
एक रात, जब वह अपने छोटे टेलीस्कोप से शनि के छल्लों को देखने की कोशिश कर रहा था, उसकी नज़र पास वाली छत पर पड़ी। वहाँ एक लड़की बैठी थी, हाथ में एक डायरी और पेन लिए, कुछ लिख रही थी। उसका नाम 'कियारा' था। कियारा एक मशहूर इन्फ्लुएंसर थी, जिसकी ज़िंदगी सोशल मीडिया पर चमकती थी, लेकिन असल में वह उस चकाचौंध से थक चुकी थी।
आकाश ने देखा कि कियारा भी ऊपर की तरफ देख रही थी, लेकिन उसकी आँखें उदास थीं। अगले कुछ दिनों तक यह सिलसिला चलता रहा। दोनों के बीच कोई बातचीत नहीं हुई, बस एक-दूसरे की मौजूदगी का अहसास था।
एक दिन, तेज़ बारिश के बाद, आसमान एकदम साफ़ था। तारे ज़्यादा चमकदार लग रहे थे। आकाश ने सोचा कि आज कियारा को कुछ ख़ास दिखाना चाहिए। उसने कागज़ के एक बड़े टुकड़े पर एक संदेश लिखा: "क्या तुमने वह तारा देखा?" और उसे अपनी छत की मुंडेर पर खड़ा कर दिया।
कियारा ने संदेश देखा और थोड़ा मुस्कुराई। उसने अपनी डायरी का एक पन्ना फाड़ा और लिखा: "कौन सा? यहाँ तो बहुत कम हैं।"
आकाश ने इशारे से उसे एक ख़ास दिशा में देखने को कहा, जहाँ 'ध्रुव तारा' चमक रहा था। कियारा ने अपने टेलीस्कोप से देखा, जो शायद उसने सिर्फ़ सजावट के लिए रखा था। उसने पहली बार उस तारे को इतनी शिद्दत से महसूस किया।
दोनों के बीच यह 'मूक संवाद' (silent communication) रोज़ होने लगा। वे संदेशों के ज़रिए एक-दूसरे को तारों, ग्रहों और अंतरिक्ष के रहस्यों के बारे में बताते। कियारा ने अपनी डिजिटल दुनिया छोड़कर, इस असली और शांत दुनिया में दिलचस्पी लेनी शुरू कर दी। उसने अपनी डायरी में लिखना शुरू किया कि कैसे शहर के शोर के ऊपर एक पूरी नई, शांत भाषा है—तारों की भाषा।
कुछ हफ़्तों बाद, एक दिन कियारा की छत पर एक पार्टी थी। बहुत शोर था, और आकाश अपनी छत पर अकेला था। पार्टी ख़त्म होने के बाद, जब सब जा चुके थे, कियारा आकाश की छत पर आई।
पहली बार वे आमने-सामने बात कर रहे थे।
"तुम्हारी दुनिया मेरी दुनिया से बहुत अलग है, आकाश," कियारा ने कहा। "यहाँ शांति है, जबकि मेरी ज़िंदगी में सिर्फ़ शोर था।"
आकाश ने जवाब दिया, "शोर में हम ख़ुद को खो देते हैं, कियारा। शांति में हम ख़ुद को पाते हैं। तारे हमें यही सिखाते हैं—अंधेरे में भी चमकना।"
उस रात, वे शहर की रोशनियों से दूर, तारों की छाँव में बैठे रहे। कियारा ने अपनी मशहूर 'ऑनलाइन' ज़िंदगी छोड़ दी और एक लेखिका बन गई, जो अंतरिक्ष और शांति के बारे में लिखती थी। आकाश का अकेलापन दूर हो गया, और उसे एक दोस्त मिल गई, जो उसकी दुनिया को समझती थी।
दोनों ने यह साबित कर दिया कि सच्चे रिश्ते ढूँढने के लिए कभी-कभी ज़मीन की चमक नहीं, बल्कि आसमान के अंधेरे और उसमें टिमटिमाते तारों को देखना पड़ता है।
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