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CPCT CENTER जिला पंचायत उमरिया (म.प्र.) संपर्क:- 9301406862

created Tuesday January 06, 08:51 by R PATEL


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अहिल्‍या की कहानी:- माता अहिल्‍या ब्रह्मा की मानस पुत्री थीं और अत्‍यंत रूपवती थीं।  
ब्रह्मा ने उनसे विवाह के लिए शर्त रखी कि जो त्रिलोक की परिक्रमा करेगा, वही उनसे विवाह करेगा। इंद्र ने छल से परिक्रमा पूरी कर ली, लेकिन नारद मुनि ने बताया कि गौतम ऋषि ने गाय माता की परिक्रमा करके यह कार्य पूरा किया, जिससे ब्रह्मा ने अहिल्‍या का विवाह गौतम ऋषि के करवा दिया।  
तत्पश्‍चात एक दिन, जब गौतम ऋषि आश्रम से बाहर थे, देवराज इंद्र ने गौतम ऋषि का रूप धारण कर अहिल्‍या के साथ संभोग किया।  
कुछ कथाओं के अनुसार, अहिल्‍या को यह पता था कि यह इंद्र है, पर वह विरोध नहीं कर सकीं, जबकि कुछ में उन्‍हें धोखे का शिकार बताया गया है।  
जब गौतम ऋषि लोटे और सत्‍य का पता चला तो वे अत्‍यंत क्रोधित हुए। उन्‍होंने अहिल्‍या को श्राप दिया कि वह पत्‍थर (शिला) बन जाएंगी और एकाकी जीवन जिएंगी, और इंद्र को भी श्राप दिया कि उनके शरीर पर हजार छिद्र हो जाएं (हजार योनि चिन्‍ह)।  
कालांतर में, जब भगवान राम, लक्ष्‍मण और विश्‍वामित्र के साथ वनवास के दौरान उस स्‍थान से गुजरे, तो विश्‍वामित्र ने राम को अहिल्‍या की कथा सुनाई।  
श्रीराम के चरण-स्‍पर्श से अहिल्‍या का उद्धार हुआ और वे पुन: सुंदर नारी रूप में लौट आईं।  
अहिल्‍या की कहानी स्‍त्री-शुद्धि, पश्‍चाताप, और पति-पत्नि के रिश्‍ते की जटिलताओं को दर्शाती है।  
उन्‍हें पंचकन्‍याओं (अहिल्‍या, द्रोपदी, सीता, तारा, मंदोदरी) में से एक माना जाता है, जिनके नाम सुबह लेने से पाप दूर होते हैं।  

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