Text Practice Mode
stenographer_pa07 / cpct 16,17,18 january 2026
created Today, 11:35 by Mergekhanna
0
277 words
29 completed
0
Rating visible after 3 or more votes
saving score / loading statistics ...
00:00
संसद ने सितम्बर, 1996 में 81 वें संविधान संशोधन विधेयक पेश कर एक ऐतिहासिक और क्रांतिकारी कदम उठाया है। जिसमें लोकसभा में लगभग एक सौ इक्यासी और राज्य विधान सभाओं में एक तिहाई स्थानों पर महिलाओं को आरक्षण देना प्रसवित है। भारतीय समाज में महिलाऍं लगभग पचास प्रतिशलत हैं जो अशिक्षा, पिछड़ापन, रूढि़वादिता, धार्मिक कट्टरता,शोसषण के कारण समाज जड़ स्थिति में रहा है। जहॉं समाज सुदृढ़ होता है वहां व्यक्ति को समाज का डर होता है। जिसके कारण समाज में बुराईयां नही पनप पाती है। राज्य को भी ऐसे समाज में कम हस्तक्षेप करना पड़ता है , लेकिन भारत में समाज दोषपूर्ण और कमजोर हात होता है। अगर महिलाओं की दयनीय स्थिति के संदर्भ में हम देखें तो समाज बुराईयों में इतना जकड़ गया है कि वह स्वयं अपनी बुराईयों को दूर करने कमें सक्षम नहीं हो पा रहा है। इस बारे में जहां तक मैं समझता हूं समाज के अंदर सुधार दो तरह से किये जा सकते हैं एक तो समाज स्वयं को बदले या राज्य वैधानिक रूप से यहां बदलाव लाएं। यह कितने खेद कर की बात है कि समाज में व्याप्त इन बुराइयों को दूर करने के लिए हमें कानून बनाने पड़ रहे हैं। दहेज प्रथा उन्मूलन, पुत्रियों को संपत्ति में अधिकार और हाल ही में गृहणियों को साप्ताहिक अवकाश देने संबंधी आदि इन विधायी कार्यों से भारतीय समाज में विध् विशेष अंतर नहीं हुआ, क्यों कि यह त बातें महिलाओं के सामाजिक स्तर से बंबंधित थीं जिन्हें समाज और परिवार कार्या रूप में परिणीत नहीं करना चाहे तो व्यक्तिगत स्तर पर महिला की स्थिति इतनी मजबूत नहीं है कि वह इन्हें लागू करवा से। लेकि राजनीति प्रक्रिया में महिलाओं के अधिक प्रवेश
saving score / loading statistics ...