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created Nov 6th, 15:41 by Success Shorthand Academy By Anurag Sir


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इस परिस्थितियों में अपील या संशोधन के प्रावधान की अनुपस्थिति का कोई परिणाम नहीं हो सकता है। किसी भी दर पर इस न्‍यायालय के एक से अधिक निर्णयों में यह बताया गया है कि जब शक्ति का प्रयोग उच्‍चतम में से एक द्वारा किया जाना है अधिकारियों को यह तथ्‍य कि कोई अपील प्रदान नहीं की गई है, क्षण भर की बात  है। यह कहा गया था कि हालांकि शक्ति विवेकाधीन थी लेकिन यह आवश्‍यक रूप से भेदभावपूर्ण नहीं थी और शक्ति के दुरुपयोग को आसानी से नहीं माना जा सकता था। इसके अलावा एक धारणा थी कि सार्वजनिक अधिकारी ईमानदारी से और कानून के नियमों के अनुसार अपने कर्तव्‍यों का निर्वहन करेंगे। हालांकि ये निर्णय कला के दायरे को समझाने में दिए गए थे। भारत के संविधान का लेकिन इन निर्णयों से निकाला गया सिद्धांत वर्तमान मामले पर लागू होता है ताकि यह दिखाया जा सके कि मुकदमे की निष्‍पक्षता को तब माना जाना चाहिए जब एक उच्‍च न्‍यायालय के न्‍यायाधीश की स्थिति का व्‍यक्ति किसी आरोपी के खिलाफ मामले की कोशिश करता है। अधिनियम की एक अन्‍य महत्‍वपूर्ण विशेषता यह है कि अन्‍य मामलों के विपरीत , एक विशेष न्‍यायालय के निर्णय के खिलाफ अपील देश के सर्वोच्‍च न्‍यायालय, अर्थात् सर्वोच्‍च न्‍यायालय में होती है, और अपील तथ्‍यों और दोनों पर अधिकार के रूप में निहित होती है। दूसरे शब्‍दों में, विशेष न्‍यायालय द्वारा दिए गए सामग्री, साक्ष्‍य और निष्‍कर्षों के विविध पहलुओं पर बिना किसी कानूनी या तथ्‍यात्‍मक बंधन के विचार करने के लिए बाध्‍य है। प्रतिबंध इस प्रकार, उपरोक्‍त विशेषताओं के विश्‍लेषण से स्‍पष्‍ट रूप से पता चलता है कि किसी भी आरोपी को मुकदमे की निष्‍पक्षता के खिलाफ कोई वास्‍तविक शिकायत नहीं हो सकती है जो कि अधिनियम द्वारा उसके साथ की गई है। यदि तथ्‍य या कानून की कोई विशेष न्‍यायाधीश द्वारा की जाती है  

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