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साँई कम्प्यूटर टायपिंग इंस्टीट्यूट गुलाबरा छिन्दवाड़ा म0प्र0 संचालक:- लकी श्रीवात्री मो0नां. 9098909565
created Saturday March 29, 07:06 by Sai computer typing
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बहुत पुरानी बात है एक जंगल में एक गुरूकुल था जिसमें बहुत सारे बच्चे पढ़ने आते थे एक बात की बात है गुरू जी सभी विद्यार्थीओ को पढ़ा रहे थे मगर एक विद्यार्थी ऐसा था जिसे बार-बार समझाने पर भी समझ में नहीं आ रहा था। गुरू जी को बहुत तेज से गुस्सा आया और उन्होंने उस विद्यार्थी से कहा जरा अपनी हथेली तो दिखाओं बेटा। विद्यार्थी ने हथेली गुरू जी के आगे कर दी हथेली देखकर गुरू जी बोले बेटा तुम घर चले जाओ आश्रम में रहकर अपना समय व्यर्थ मत करो तुम्हारे भाग्य में विद्या नहीं है।
शिष्य ने पूछा क्यों गुरू जी? गुरू जी ने कहा तुम्हारे हाथ में विद्या की रेखा नहीं है। गुरू जी ने एक होशियार विद्यार्थी की हथेली उसे दिखाते हुए कहा यह देखो ये विद्या की रेखा यह तुम्हारे हाथ में नहीं है इसलिए तुम समय नष्ट ना करो और घर चले जाओं वहा अपना कोई काम देखो। यह सुनने के बाद उस विद्यार्थी ने अपने जेब से एक चाकू निकाला जिसका प्रयोग वह रोज सुबह अपनी दातुन काटने के लिए करता था उस चाकू से उसने अपनी हाथ में एक गहरी लकीर बना दी। हाथ ने खून बहने लगा तब वह गुरू जी से बोला अपने हाथ में विद्या की रेखा बना ली है गुरू जी।
यह देखकर गुरू जी द्रवित हो गए और उन्होंने उस विद्यार्थी को गले से लगा लिया। गुरू जी बोले बोले बेटा तुम्हे विद्या सिखने से कोई ताकत नही रोक सकती है द्रढ, निश्चय और परिश्रम हाथ की रेखाओं को ही बदल देती है। दोस्तों वह विद्यार्थी आगे महर्षि पाणिनि के नाम से प्रसिद्ध हुए जिसने विश्व प्रसिद्ध व्याकरण अष्टाघ्यायी की रचना की है इतनी सदिया बीत जाने के बाद आज 2700 वर्षो बाद भी विश्व की किसी भी भाषा में ऐसा उत्कृष्ट और पूर्ण व्याख्या का ग्रन्थ अब तक नहीं बना।
शिक्षा- इस कहानी की शिक्षा यह है कि लोग चाहे जो भी बोले हम हर एक को गलत साबित करते हुए अपनी लागन और कठिन परिश्रम के दम पर जो चाहे वो सब कुछ हासिल कर सकते है।
शिष्य ने पूछा क्यों गुरू जी? गुरू जी ने कहा तुम्हारे हाथ में विद्या की रेखा नहीं है। गुरू जी ने एक होशियार विद्यार्थी की हथेली उसे दिखाते हुए कहा यह देखो ये विद्या की रेखा यह तुम्हारे हाथ में नहीं है इसलिए तुम समय नष्ट ना करो और घर चले जाओं वहा अपना कोई काम देखो। यह सुनने के बाद उस विद्यार्थी ने अपने जेब से एक चाकू निकाला जिसका प्रयोग वह रोज सुबह अपनी दातुन काटने के लिए करता था उस चाकू से उसने अपनी हाथ में एक गहरी लकीर बना दी। हाथ ने खून बहने लगा तब वह गुरू जी से बोला अपने हाथ में विद्या की रेखा बना ली है गुरू जी।
यह देखकर गुरू जी द्रवित हो गए और उन्होंने उस विद्यार्थी को गले से लगा लिया। गुरू जी बोले बोले बेटा तुम्हे विद्या सिखने से कोई ताकत नही रोक सकती है द्रढ, निश्चय और परिश्रम हाथ की रेखाओं को ही बदल देती है। दोस्तों वह विद्यार्थी आगे महर्षि पाणिनि के नाम से प्रसिद्ध हुए जिसने विश्व प्रसिद्ध व्याकरण अष्टाघ्यायी की रचना की है इतनी सदिया बीत जाने के बाद आज 2700 वर्षो बाद भी विश्व की किसी भी भाषा में ऐसा उत्कृष्ट और पूर्ण व्याख्या का ग्रन्थ अब तक नहीं बना।
शिक्षा- इस कहानी की शिक्षा यह है कि लोग चाहे जो भी बोले हम हर एक को गलत साबित करते हुए अपनी लागन और कठिन परिश्रम के दम पर जो चाहे वो सब कुछ हासिल कर सकते है।
