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साँई कम्प्यूटर टायपिंग इंस्टीट्यूट गुलाबरा छिन्दवाड़ा म0प्र0 संचालक:- लकी श्रीवात्री मो0नां. 9098909565
created Mar 24th, 06:06 by Jyotishrivatri
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एक गांव में एक मूर्ख किसान रहता था। वही क्या वह तो पूरा गांव ही मूर्ख था। वह किसान बड़ा गरीब था, उसके पास छोटा सा एक खेत था। जिससे वह अपना तथा अपने परिवार का पालन-पोषण करता था। घर में वह उसकी पत्नी तथा तीन छोटे-छोटे बच्चे थे। खेती-बाड़ी के लिए दो बैल तथा एक गाय थी।
एक दिन किसान ने सोचा कि- मुझे खेती करते हुये बहुत दिन हो गये है। इसलिए अब कुछ दिन तक आराम से घर पर बैठकर खाना चाहिये। ऐसा विचार करके उसने उसी दिन से खेतों पर काम करना बंद कर दिया। कुछ दिन तक तो किसान खूब अच्छी तरह मौज उड़ाता रहा। लेकिन जब उसके पास धन थोड़ा रह गया, तो उसकी स्त्री ने उससे कहा कि- अब तुम खेती करना शुरू कर दो। लेकिन किसान के कानों पर जूं तक नहीं रेंगी। जब इसी प्रकार कई दिन गुजर गये तो उसकी स्त्री ने एक दिन क्रोधित होते हुये कहा- देखो जी आप मेरी किसी भी बात पर ध्यान नहीं देते। घर का तथा जानवरों खर्च कहां से आयेगा। खेत पर जाये बिना काम कैसे चलेगा।
किसान ने गुस्से में कहा- तुम्हें इससे क्या मतलब? मैं तो अपने खेत पर जा रहा हूं। उस आदमी ने कहा- देखो बात यह है कि तुम इस समय खेत को जोतोगे तो वहां तुम्हें सोने का घड़ा अशरफियों से भरा हुआ मिलेगा, इसलिए तुम आज से ही पूरे खेत को जोत डालो। लेकिन एक बात का और ध्यान रखना, कि धन को पाकर घमंड मत करना वरना तुम्हारा धन लूट या छीन लिया जायेगा।
वह किसान मूर्ख तो था ही इसलिए उसने उस आदमी की बात पर कोई ध्यान नहीं दिया। लेकिन जब वह अचानक गायब हो गया, तो उसे बड़ा आर्श्चय हुआ। वह अपने खेत पर जा पहुंचा और उसने खेत जोतना आरंभ कर दिया। जोतते-जोतते अचानक उसके हल का फार किसी चीज से टकराकर जमीन में गढ़ गया। किसान ने बहुत कोशिश की, कि हल को बाहर निकाल ले। लेकिन फार इतनी गहराई से जमीन में गढ़ गया था कि किसी तरह निकलता ही नहीं था।
खेत में पहुंचकर किसान की पत्नी ने देखा कि हल का फार धरती में गड़ा हुआ है। अब दोनों ने जोर लगाना शुरू किया। आखिर में खूब खींचतान करने पर बड़े जोर की आवाज के साथ हल का फाल जमीन से छूट कर अलग हो गया। जैसे ही फार अलग हुआ वैसे ही खन की आवाज के साथ एक सोने का ढक्कन अलग हो गया। किसान की पत्नी बुद्धिमान थी। उसने गड्ढे में जाकर देखा तो अशरफिया नजर आयी।
किसान और उसकी पत्नी की आंखे फटी की फटी रह गयी। दोनों बहुत खुश हुये जब उसे लेकर घर पहुंचे तो किसान को उस आदमी की बात याद आयी जिसने इसकी भविष्यवाणी पहले ही कर दी थी। उसने जब यह बात पत्नी से बतायी तो उसने सोचा कि कहने वाला भगवान के सिवा और कौन हो सकता है।
एक दिन किसान ने सोचा कि- मुझे खेती करते हुये बहुत दिन हो गये है। इसलिए अब कुछ दिन तक आराम से घर पर बैठकर खाना चाहिये। ऐसा विचार करके उसने उसी दिन से खेतों पर काम करना बंद कर दिया। कुछ दिन तक तो किसान खूब अच्छी तरह मौज उड़ाता रहा। लेकिन जब उसके पास धन थोड़ा रह गया, तो उसकी स्त्री ने उससे कहा कि- अब तुम खेती करना शुरू कर दो। लेकिन किसान के कानों पर जूं तक नहीं रेंगी। जब इसी प्रकार कई दिन गुजर गये तो उसकी स्त्री ने एक दिन क्रोधित होते हुये कहा- देखो जी आप मेरी किसी भी बात पर ध्यान नहीं देते। घर का तथा जानवरों खर्च कहां से आयेगा। खेत पर जाये बिना काम कैसे चलेगा।
किसान ने गुस्से में कहा- तुम्हें इससे क्या मतलब? मैं तो अपने खेत पर जा रहा हूं। उस आदमी ने कहा- देखो बात यह है कि तुम इस समय खेत को जोतोगे तो वहां तुम्हें सोने का घड़ा अशरफियों से भरा हुआ मिलेगा, इसलिए तुम आज से ही पूरे खेत को जोत डालो। लेकिन एक बात का और ध्यान रखना, कि धन को पाकर घमंड मत करना वरना तुम्हारा धन लूट या छीन लिया जायेगा।
वह किसान मूर्ख तो था ही इसलिए उसने उस आदमी की बात पर कोई ध्यान नहीं दिया। लेकिन जब वह अचानक गायब हो गया, तो उसे बड़ा आर्श्चय हुआ। वह अपने खेत पर जा पहुंचा और उसने खेत जोतना आरंभ कर दिया। जोतते-जोतते अचानक उसके हल का फार किसी चीज से टकराकर जमीन में गढ़ गया। किसान ने बहुत कोशिश की, कि हल को बाहर निकाल ले। लेकिन फार इतनी गहराई से जमीन में गढ़ गया था कि किसी तरह निकलता ही नहीं था।
खेत में पहुंचकर किसान की पत्नी ने देखा कि हल का फार धरती में गड़ा हुआ है। अब दोनों ने जोर लगाना शुरू किया। आखिर में खूब खींचतान करने पर बड़े जोर की आवाज के साथ हल का फाल जमीन से छूट कर अलग हो गया। जैसे ही फार अलग हुआ वैसे ही खन की आवाज के साथ एक सोने का ढक्कन अलग हो गया। किसान की पत्नी बुद्धिमान थी। उसने गड्ढे में जाकर देखा तो अशरफिया नजर आयी।
किसान और उसकी पत्नी की आंखे फटी की फटी रह गयी। दोनों बहुत खुश हुये जब उसे लेकर घर पहुंचे तो किसान को उस आदमी की बात याद आयी जिसने इसकी भविष्यवाणी पहले ही कर दी थी। उसने जब यह बात पत्नी से बतायी तो उसने सोचा कि कहने वाला भगवान के सिवा और कौन हो सकता है।
