Text Practice Mode
साँई कम्प्यूटर टायपिंग इंस्टीट्यूट गुलाबरा छिन्दवाड़ा म0प्र0 संचालक:- लकी श्रीवात्री मो0नां. 9098909565
created Mar 22nd, 11:09 by lucky shrivatri
1
329 words
71 completed
0
Rating visible after 3 or more votes
saving score / loading statistics ...
00:00
चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन करते हुए आधार कार्ड से वोटर आइडी को जोड़ने का निर्णय लिया है। इससे पहले आयोग ने कहा कि अब किसी भी मतदान केंद्र पर 1200 से अधिक मतदाता नहीं होंगे। ये फैसले देश में लोकतंत्र की जड़ों को और मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण और स्वागत योग्य कदम है। भारत जैसे विशाल और विविधतापूर्ण देश में मतदान कराना बेहद मुश्किल काम है। मतदान केंद्रों पर मतदाताओं की लंबी कतारें और सीमित संसाधन चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित करते हैं। इससे मतदाता हतोत्साहित होते है और मतदान का कम आंकड़ा लोकतंत्र की विश्वसनीयता पर सवाल खड़ा करता है।
यही कारण हैं कि मतदान के आंकड़ो संसद और कोर्ट तक पहुंच जाते है। आयोग के फैसले इसलिए भी अहम हैं कि मतदान केंद्रों पर 1200 से कम मतदाता होने पर भीड़ होगी। दैनिक मजदूर, छोटे दुकानदार रिक्शा चालक, ड्राइवर और निम्न आय वर्ग के लोग मतदान के बाद अपने काम पर जा सकेगे। दूसरा पहलू यह भी है कि दूर-दराज के इलाकों में रहने वाले लोगों का मतदान केंद्रों तक पहुंचने में सहूलियत होगी और मतदान में उनकी भागीदारी बढ़ेगी। हालांकि नए मतदान केंद्रों के लिए संसाधनों की उपलब्धता सुरक्षा और प्रशिक्षित चुनाव कर्मी संबंधी कई चुनौतियां होगी, लेकिन स्वस्थ लोकतंत्र के लिए इन पर पार पाना ही होगा। आधार कार्ड से वोटर आइडी के जुड़ने से मतदान सूची में फर्जी मतदाताओं के नाम जोड़ने के विवादों से मुक्ति मिलेगी। हालांकि इस पूरी प्रक्रिया में किसी भी नागरिक की निजता का उल्लंघन ना हो, यह सुनिश्चित करना होगा।
सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग से मतदान के 48 घंटे में अंतिम प्रमाणित वोटर अर्नआउट के आकंड़े भी जारी करने पर विचार करने को कहा है। आयोग इस मामले पर भी विचार कर रहा है। विपक्ष या चुनाव हारने वाले दल वोटर टर्नआउट के आंकड़ों को लेकर आशंकित रहते है। इसे लेकर ससंद के दोनों सदनों में सवाल भी उठाए गए। इन निर्णयों से राजनीतिक दलों की भी आशंकाए दूर हो सकेगी।
यही कारण हैं कि मतदान के आंकड़ो संसद और कोर्ट तक पहुंच जाते है। आयोग के फैसले इसलिए भी अहम हैं कि मतदान केंद्रों पर 1200 से कम मतदाता होने पर भीड़ होगी। दैनिक मजदूर, छोटे दुकानदार रिक्शा चालक, ड्राइवर और निम्न आय वर्ग के लोग मतदान के बाद अपने काम पर जा सकेगे। दूसरा पहलू यह भी है कि दूर-दराज के इलाकों में रहने वाले लोगों का मतदान केंद्रों तक पहुंचने में सहूलियत होगी और मतदान में उनकी भागीदारी बढ़ेगी। हालांकि नए मतदान केंद्रों के लिए संसाधनों की उपलब्धता सुरक्षा और प्रशिक्षित चुनाव कर्मी संबंधी कई चुनौतियां होगी, लेकिन स्वस्थ लोकतंत्र के लिए इन पर पार पाना ही होगा। आधार कार्ड से वोटर आइडी के जुड़ने से मतदान सूची में फर्जी मतदाताओं के नाम जोड़ने के विवादों से मुक्ति मिलेगी। हालांकि इस पूरी प्रक्रिया में किसी भी नागरिक की निजता का उल्लंघन ना हो, यह सुनिश्चित करना होगा।
सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग से मतदान के 48 घंटे में अंतिम प्रमाणित वोटर अर्नआउट के आकंड़े भी जारी करने पर विचार करने को कहा है। आयोग इस मामले पर भी विचार कर रहा है। विपक्ष या चुनाव हारने वाले दल वोटर टर्नआउट के आंकड़ों को लेकर आशंकित रहते है। इसे लेकर ससंद के दोनों सदनों में सवाल भी उठाए गए। इन निर्णयों से राजनीतिक दलों की भी आशंकाए दूर हो सकेगी।
