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साँई कम्‍प्‍यूटर टायपिंग इंस्‍टीट्यूट गुलाबरा छिन्‍दवाड़ा म0प्र0 संचालक:- लकी श्रीवात्री मो0नां. 9098909565

created Mar 20th, 09:15 by lovelesh shrivatri


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एक दिन एक शिष्‍य अपने गुरू के पास आया और बोला, गुरूदेव, मन बहुत दुखी है। लोग मेरे साथ बुरा व्‍यवहार करते हैं, जिससे में कड़वाहट महसूस करता हूं। कृपया मुझे इस दर्द से मुक्‍त होने का उपाय बताइए। गुरू मुस्‍कुराए और बोले, एक गिलास पानी में एक चम्‍मच नमक डालो और उसे पीकर बताओ कि इसका स्‍वाद कैसा है? शिष्‍य ने पानी पिया और तुरंत ही अपना मुंह बना लिया, गुरूदेव यह तो बहुत खारा और कड़वा है। गुरूजी उसे पास की झील के किनारे ले गए और बोले, अब  इस चम्‍मच भर नमक को झील में डाल दो। शिष्‍य वे वैसा ही किया। गुरू ने पूछा अब झील का पानी पीकर बताओ कि इसका स्‍वाद कैसा है? शिष्‍य ने झील से पानी पिया और बोला गुरूदेव यह तो बिल्‍कुल ताजा और मीठा है। गुरू मुस्‍कुराए और बोले, देखो जीवन में दुख और कड़वाहट नमक के समान होती है। उसकी मात्रा वही रहती है, लेकिन यह इस पर निर्भर करता है कि तुम उसे कितनी बड़ी जगह में घोलते हो। अगर तुम्‍हारा मन एक छोटे गिलास के समान है, तो थोड़ा-सा दुख भी असहनीय लगेगा। लेकिन यदि तुम अपने मन को एक झील की तरह विशाल बना लो, तो वही दुख उसमें विलीन हो जाएगा और तुम्‍हें  महसूस भी नहीं होगा।   

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