Text Practice Mode
BUDDHA ACADEMY TIKAMGARH (MP) || ☺ || ༺•|✤ आपकी सफलता हमारा ध्येय ✤|•༻
created Mar 20th, 03:40 by Buddha Typing
0
545 words
76 completed
0
Rating visible after 3 or more votes
saving score / loading statistics ...
00:00
बहुत पुराने जमाने के बाद है एक लोहार अपने दुकान में बैठकर लोहा पीट पीटकर अपना काम कर रहे थे तभी उसकी दुकान से महात्मा और उसके शिष्य के गुजर हो रहे थे। शाम काफी ज्यादा होने के कारण उसे आगे चलने के लिए अच्छा नहीं सोचा था। उन्होने लोहार कहता है कि यह कोई पूछने की बात है आप जैसे महात्माओ को शरण देने और हमें आपके मेहमान नवाजी करने का मौका दो बहुत ही किस्मत से ही मिलता है। उसके बाद लोहार ने महात्मा जी के ठहरने की पूरी अच्छी सी व्यवस्था किया उनका अच्छा से मेहमान नवाजी किया और उसके बाद उनका पूरे आने जाने के थकान के कारण होने वाले सभी प्रकार के दवाइयों का भी निवारण किया जब महात्मा लोहार के यहां से जाने लगा तो महात्मा जी बहुत ज्यादा खुश हुए थे उसकी मेहमान नवाजी को देखकर। इंग्लिश में महात्मा और उसके शीशे जाने की तैयारी कर रहा था उसके बाद महात्मा लोहार के पास आता है और कहता है कि तुम्हें तीन वरदान में दे सकता हूं बताओ तुम्हें क्या चाहिए। यह बात सुनकर लोहार काफी ज्यादा खुश हो जाता है कहता है की मैं तो ऐसी चीजें मांग लूंगा जैसे मुझे बहुत ज्यादा जरूरत होती है वह बहुत सोचने लगा था और फिर कहता है कि मुझे वर्ष की आयु तक जीने के लिए चाहिए है। महात्मा कहता है कि यह लो हो गया अब तुम वर्ष तक जिंदा रहोगे उसके बाद उसने महात्मा कहता है कि तुम अपना अगले इच्छ बताओ मैं जरूर उसे पूरा करूंगा कुछ सोचने के बाद लोहार फिर कहता है कि आप मुझे ऐसा वरदान दीजिए कि मेरे दुकान में कभी काम की कमी ना हो महात्मा ने लोहार को ऐसा वरदान दे दिया और कहा कि अब से वर्ष तक तुम्हारे दुकान में किसी भी काम की कमी नहीं होगी। उसके बाद महात्मा जी ने कहा कि अपना तीसरा वरदान बताओ लोहार के पास कुछ समझ में नहीं आया वहां जल्दी बाजी कह दिया इस कुर्सी में जो भी बैठेगा वह मेरी मर्जी के बिना नहीं उठ पाएगा ऐसा वरदान दीजिए महात्मा जी ने हुआ वरदान उसे दे दिया उन्होने कहा आज के बाद जो भी इसको से मैं बैठेगा वह तुम्हारी मर्जी के बगैर उठ नहीं पाएगा। उनकी जिदगी अपनी खुशी चलने लगी थी उसके पास किसी प्रकार का कोई काम मी बिल्कुल भी नहीं हो रही थी कभी भी उसके बाद उन्होने बहुत दिनों तक हटा करना और जवान रहा लेकिन उसके सभी साथियों मर गए थे और कुछ कुछ तुम वरना बूढे हो गए थे कि मरने ही वाला था लेकिन लोहार को अभी तक कुछ भी नहीं हुआ था। क्योकि लोहार को महात्मा जी ने एक वर्ष जीने की वरदान जो दिया था जैसे ही एक वर्ष पूरा होने ही वाला था कि हम राजेश के त्यौहार पर आता है और लोहा से कहता है कि तुम्हारा वक्त पूरा हो चुका हे चलो मेरे साथ उसके बाद लोहार अपनी होशियारी दिखाता है और यमुना से कहता है कि मुझे थोडी सी काम है मैया हथियारों को अलग अलग करके एक जगह रख दूं ताकि जो भी आएगा इसे ले जाएगा अपने प्रयोग के लिए उसके बाद लोहार यमुना से कहा है कि आप उस कुर्सी पर बैठे मिनट में मैं अपना काम पूरा कर लेता हूं
