Text Practice Mode
BUDDHA ACADEMY TIKAMGARH (MP) || ☺ || ༺•|✤ आपकी सफलता हमारा ध्येय ✤|•༻
created Mar 20th, 03:38 by typing test
0
509 words
20 completed
0
Rating visible after 3 or more votes
saving score / loading statistics ...
00:00
मानसिक स्वास्थ्य के अनुकूल कार्य परिवेश बनाने की जिम्मेदारी कंपनियों पर है। इसके लिए ऐसी दीर्घकालिक रणनीतियां बनाने की जरूरत है जो कर्मजारियों की बेहतर मानसिक सेहत को कंपनियों के ढांचे का हिस्सा बना दें। ऐसी सक्रिय कार्य संस्कृति विकसित करने की जरूरत है जो काम करने वालों के मुफीद हो नीति और संस्कृति अलग अलग हैं। नीति काम करने के समय को लचीला बना सकती है पर लचीलेपन में गहराई न हो बडे अधिकारी अगर उसे अपनी कार्य संस्कृति में ने उतारें तो कोई लाभ नहीं टीम लीडर नियमिल रूप से देर तक काम करते हो तो टीम के सदस्यों के लिए कार्य और जीवन में संतुलन बिठाना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। अत: नीति बनाना और उसे कार्य संस्कृति में उतारना जरूरी है। विशेष रूप से उन लोगों को लचीली नीति का लाभ देना चाहिए जो किसी न प्रकार से मानसिक तकलीफ की सूचना देते है। हमें एक ऐसी संस्कृति की भी जरूरत है जो मानसिक सामाजिक जोखिमों के प्रति सचेत हो और कार्यस्थल में समावेश व सहानुूभूति को प्राथमिकता दे कार्य स्थल पर विविधता का भी सम्मान जरूरी है । एक ही दृष्टिकोण को विविध पृष्ठभूमि और अनुभवों वाले व्यक्तियों पर समान रूप से लागू नहीं किया जा सकता। नया कर्मचारी जो नया नया किसी कस्बे या गांव से शहर आया है उसे लंबे समय से काम कर रहे या स्थानीय स्तर पर जमे कर्मचारी से अलग चुनौतियों का सामना करना पडेगा। एक महिला अधिकारी पर अपने परिवार के देखभाल की जिम्मेदारियां भी हो सकती है जो उसी पद पर बैठे पुरूष के पास नहीं होगी। कुछ समुदाय जैसे विकलांग एलजीबीटीक्यूआई दलित आदिवासी धार्मिक अल्पसंख्यक कार्यस्थल पर ऐसे भेदभाव का सामना कर सकते हैं जो अन्य लोग नहीं करते हैं। हमें एक ऐसी संस्कृति विकसित करनी चाहिए जो समावेशी लचीली सहानुभूतिपूर्ण और विभिन्न प्रकार के लोगों के अनुकूल हो। उदाहरण के लिए मारीवाला हेल्थ इनिशिएटिव ने एक प्रशिक्षण पाठद्यक्रम द फॉल्टइन अवरचाय तैयार किया है जो संवेदनशील और समावेशी कार्यस्थल बनाने में मदद करता है। अव्वल तो जरूरी है कि कार्य स्थल पर खुलापन विकसित किया जाए। कॉरपोरेट नेता एक खुली न्यायपूर्ण और पारदर्शी संस्कृति के लिए माहौल तैयार करें सभी के प्रति सम्मानजनक होने के साथ ही हमें संवाद के रास्ते पर चलना होगा। टी लीडर को रोल मॉडल बनना होगा यहां दूसरे की सुनना और सहानुभूति रखना जरूरी है। यदि लोग सीधे संवाद नहीं कर सकते हैं तो इससे चुगली छल प्रपंच की स्थिति बनती है इसका गलत मनोवैज्ञानिक असर पड सकता है। अपनेपन की भावना प्रेरणा को बढ़ावा देती है परिणामस्वरूप उच्च उत्पादकता प्राप्त होती है। काम करने में लोगों की मदद करके उनके बीच जुडाव को बढावा दिया जा सकता है। एक सक्रिय जॉब रोटेशन भी कर्मचारियों को नया अनुभव व सीख देता है और काम से संबंधित तनाव को भी कम करता है। ध्यान रखने की बात है कि सप्ताह में कार्य घंटो का से ज्यादा होना प्रति उत्पादक होता है खासकर वहां जहां कार्यस्थल पर पहुचने में घंटो लगते हैं। जहां जरूरत हो वहां कर्मचारियों को हरसंभव मानसिक स्वास्थ्य यहायता मिलनी चाहिए कार्यस्थल पर ऐसे माहौल का पोषण करना महत्वपूर्ण है।
