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साँई कम्‍प्‍यूटर टायपिंग इंस्‍टीट्यूट गुलाबरा छिन्‍दवाड़ा म0प्र0 संचालक:- लकी श्रीवात्री मो0नां. 9098909565

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गांव में होली की तैयारियां जोरों पर थी। बच्‍चे, बड़े महिलाएं सब रंग-गुलाल, पकवान और उत्‍सव की उमंग में डूबे थे। पंडित रमाशंकर और लाला दीनानाथ, जो बरसों से आपस में दुश्‍मनी रखते थे, उनके परिवार भी इस दुश्‍मनी के रंग में रंग चुके थे। दोनों के बच्‍चे भी एक-दूसरे से बात नहीं करते थे। रवि और मोहन, जो पहले गहरे मित्र थे, अब एक दूसरे को देखना तक पसंद नहीं करते थे। होली के दिन दोनों अपने-अपने दोस्‍तों के साथ रंग खेलने निकले। पूरा गांव रंगों से सराबोर था, पर दोनों पक्ष अलग-अलग गुटों में थे। अचानक रवि फिसलकर कीचड़ में गिर गया।  
मोहन यह सब देख रहा था। उसने झिझकते हुए अपने हाथ में रखा गुलाल निकाला और रवि के गाल पर लगा दिया। होली में दुश्‍मनी नहीं, दोस्‍ती का रंग चढ़ता है, मोहन ने मुस्‍कुराते हुए कहा। रवि पहले हिचकिचाया, फिर वह भी हंस पड़ा और मोहन को गुलाल लगा दिया। दोनों गले मिल गए। जब यह दृश्‍य गांववालों ने देखा, तो सभी की आंखे भर आई। पंडित रमाशंकर और लाल दीनानाथ भी भावुक हो गए। वर्षो की दुश्‍मनी पिघल गई और दोनों ने गले मिलकर पुराने गिले-शिकवे भुला दिए। इस तरह होली पर दिलों में भी स्‍नेह और मेल-मिलाप के नए रंग चढ़े। गांव के लोगों ने समझ लिया कि होली रंगों का नहीं, बल्कि दिलों को जोड़ने का त्‍योहार है।  

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