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SHAHID MANSOORI, MP HIGH COURT ag3 hindi typing with zero error, khurai, sagar,m.p.

created Aug 7th, 06:01 by shahidman009238


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साक्ष्‍य पर विचार करने एवं अपीलार्थी के विद्वान काउंसेल के तर्कों को सुनने के पश्‍चात् न्‍यायालय यह अभिनिर्धारित करता है कि प्रस्‍तुत मामले के तथ्‍यों एवं परिस्थितियों में अभियुक्‍त विनोद को अंतिम बार देखे जाने के एक मात्र साक्ष्‍य के आधार पर दोषी नहीं ठहराया जा सकता। यह तथ्‍य कि 31 जनवरी 1991 को 5 बजे अपराह्न वनराकस को मंदिर के पास या अभियुक्‍त विनोद उसे उत्‍तर की ओर राजू के खेत की ओर लेकर जा रहा था। अपीलार्थी को दोषसिद्ध करने के लिए पर्याप्‍त नहीं है। इस मुद्दे पर दिए गए साक्ष्‍य को परिस्थितियों की संपूर्ण कड़ी को जोड़ने में उपयोग किया जा सकता है। दूसरे शब्‍दों में यह और कुछ नहीं बल्कि पारिस्थितिक साक्ष्‍य की एक श्रृंखला है जिसका आश्रय अभियोजन ने लिया है। अपीलार्थी के विद्वान काउंसेल ने तत्‍पश्‍चात् अभियुक्‍त द्वारा साक्ष्‍यों अर्थात् अभियोजन साक्षी 7 और अभियोजन साक्षी 11 के समक्ष की गई न्‍यायिकेतर संस्‍वीकृति को प्रश्‍नगत किया। न्‍यायिकेतर संस्‍वीकृति के साक्ष्‍य की संवीक्षा करने से पूर्व यह उल्‍लेख करना आवश्‍यक है कि असंदिग्‍ध संस्‍वीकृति यदि वह साक्ष्‍य में ग्राह्य और संदेह से परे है और असत्‍य से मुक्‍त हो तो वह साक्ष्‍य की दृष्टि से महत्‍वपूर्ण है क्‍योंकि वह सीधे उस व्‍यक्ति के शब्‍दों में रहा है जिसने अपराध किया। किन्‍तु अभिकथित संस्‍वीकृति को साबित करने की प्रक्रिया में न्‍यायालय का यह समाधान होना चाहिए कि वह स्‍वेच्‍छापूर्ण किया गया था और यह दबाव, धमकी या वचन नहीं देकर नहीं प्राप्‍त किया गया था और परिवेश की स्थिति से यह नहीं उपदर्शित होता कि अनुचित या सहयोगी धारणाओं पर आधारित है जिससे यह लगता हो कि इसमें सच्‍चाई नहीं हो सकती। इस प्रयोजन के लिए न्‍यायालय को चाहिए कि समस्‍त सुसंगत तथ्‍यों की समीक्षा करे जैसे कि किन व्‍यक्तियों के समक्ष संस्‍वीकृति की गई, समय और स्‍थान जहां की गई किन परिस्थितियों में की गई और अंतत: किन शब्‍दों में की गई। यह सच है कि तो कोई ऐसा विधि का नियम है ही चेतना का कि न्‍यायिकेतर संस्‍वीकृति पर तब तक भरोसा किया जाए जब तक वह अन्‍य विश्‍वसनीय साक्ष्‍य द्वारा संपुष्‍ट हो। न्‍यायालयों ने न्‍यायिकेतर संस्‍वीकृति के साक्ष्‍य को कमजोर साक्ष्‍य ही समझा है।

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