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साँई कम्‍प्‍यूटर टायपिंग इंस्‍टीट्यूट गुलाबरा छिन्‍दवाड़ा (म0प्र0) संचालक:- लकी श्रीवात्री मो0नां. 9098909565

created May 17th, 03:55 by lovelesh shrivatri


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सोशल मीडिया के बारे में आम तौर पर यही कहा जाता है कि यहां सावधानी ही सुरक्षा का पहला चरण है। सीधे तौर पर सोशल मीडिया का इस्‍तेमाल करने वालों और इसके जरिए प्राप्‍त सूचनाओं से राय बनाने वालों को इसी सावधानी की तरफ ध्‍यान देना जरूरी है। फिलीपींस की नोबल शांति पुरस्‍कार विजेता पत्रकार मारिया रेसा ने भी इसी सावधानी की ओर ध्‍यान दिलाते हुए चेताया है। कि फर्जी खबरें और नकारात्‍मक प्रचार का सबसे ज्‍यादा असर सामाजिक ताने-बाने पर तो पड़ा ही है, समाचार माध्‍यमों पर भी बड़ी जिम्‍मेदारी आन पड़ी है। मारिया ने सोशल मीडिया के तरक्‍की करने की बात कहते हुए यह भी कहा कि ऑनलाइन प्‍लेटफाॅर्म ने प्रोपेगेंडा को भी बढ़ाने का काम किया है।  
देखा जाए तो सोशल मीडिया के सैंकड़ों फायदों के बीच हजारों नुकसान भी सामने आते दिख रहे हैं। ऐसे नुकसान जिनकी अनदेखी कतई नहीं की जा सकती। कई बार गलत खबरें और तथ्‍य भी इस माध्‍यम से  समूची दुनिया में पहुंच जाते हैं। यही कारण है कि सोशल मीडिया की विश्‍वसनीयता को हमेशा से ही संदेह के नजरिए से देखा जाता है सच यह भी है कि संदेह के दायरे में आने वाली ऐसी सूचनाएं ही लोगों में भ्रम फैलाने का काम करती है और कई बार हिंसक गतिविधियों को बढ़ावा देने वाली घटनाओं की वजह के रूप में सामने आती हैं।  इसी कारण सोशल मीडिया की विश्‍वसनीयता हमेशा से संदिग्‍ध रही है। ऐसे में इसके खिलाफ कड़े कानून की सख्‍त जरूरत को लेकर मांग उठती रही है। मारिया रेसा खुद गलत जानकारियों के खिलाफ वैश्विक लड़ाई का एक अहम हिस्‍सा हैं। वह लगातार सार्वजनिक मंचों पर कहती रही है कि फर्जी खबरों को बेनकाब करने के लिए 'झूठ के वायरस' से लड़ना ही होगा। इसमें दो राय नही हैं कि सोशल मीडिया लोगों की राय बनाने बदलने में अहम भूमिका निभाता है। हमारे देश में भी पिछले करीब एक दशक के दौरान सोशल मीडिया राजनीतिक दलों और राजनेताओं के लिए भी जनता से जुड़ाव का अहम माध्‍यम बना है। लेकिन इसका उपयोग सकारात्‍मक भाव से किया जाए तो नतीजे बेहतर आने की उम्‍मीद की जा सकती है।  
मरिया जब यह कहती हैं कि ऐसी स्थिति में ऐसी फर्जी खबरों को बेनकाब करने की जिम्‍मेदारी पत्रकारों की ज्‍यादा हो गई है तो उनका संकेत यह भी है कि मीडिया की भूमिका अब पहले से कहीं ज्‍यादा हो गई है। लेकिन सोशल मीडिया के 'विषदंत' तोड़ने की जिम्‍मेदारी सबकी ही है - सरकार की भी, मीडिया की भी और इसके उपयोगकर्ताओं की भी।    

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