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SHREE BAGESHWAR ACADEMY TIKAMGARH (M.P.) Contact- 8103237478

created May 17th, 02:59 by Shreebageshwar Academy


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अपने तीसरे भाई की कहानी सुनाने के बाद, नाई ने अपने चौथे भाई की कहानी सुनाई। नाई का चौथा भाई था, अलकूज जिसकी एक आंख नहीं थी। उसकी एक आंख होने की कहानी भी बड़ी दिलचस्‍प थी। नाई ने बताया कि उसका भाई एक कसाई था। उसे भेड़-बकरियों को परखने की अच्‍छी जानकारी थी। इसके साथ वह भेड़ों को लड़ाया भी करता था। उसे भेड़ों-बकरियों की कई किस्‍मों के बारे में भी खूब जानकारी थी। नगर के कई बड़े लोग उसकी भेड़ों की लड़ाई देखने आते थे। अलकूज भेड़-बकरियों का मांस भी बेचता था। इस तरह वह नगर में काफी प्रसिद्ध था। एक बार बूढ़ा आदमी अलकूज के पास आया और उससे चार से पांच किलो मांस लेकर चला गया और बदले में उसे चांदी के नए चमचमाते सिक्‍के दे गया।  
    चांदी के चमकते सिक्‍के देखकर अलकूज खुश हो गया और उसने उन्‍हें अपने संदूक में अलग रख दिया। फिर पांच महीने तक रोज इसी तरह वह बुजुर्ग आदमी अलकूज के पास आता रहा और उसे मांस के बदले चांदी के सिक्‍के देता रहा। ऐसे ही दिन बीतते जा रहे थे, लेकिन एक दिन जब अलकूज ने अपना संदूक खोल कर देखा, तो वह दंग रह गया। उसने देखा कि वो चांदी के सिक्‍के  कागज के टुकड़ों में बदल चुके थे। अलकूज यह देख कर बहुत दुखी हुआ और रोने-चिल्‍लाने लगा। उसने रो-रोकर सारे नगर को इकठ्ठा कर लिया था। लोगों ने जब अलकूज की आवाज सुनी, तो सभी उसके पास जमा हो गए। अलकूज ने नगरवासियों को अपनी कहानी सुनाई। अलकुज आखिर क्‍या करता बस रोता रहा और मन ही मन उस बुजुर्ग आदमी को कोसता रहा। उसके मन में आता रहा कि अगर वह बुजुर्ग आदमी उसे मिल जाए, तो वह उसकी अच्‍छे से खबर ले। अलकूज अपने गुस्‍से को मन ही मन बढ़ा रहा था कि तभी गली में उसे वही बूढ़ा आदमी दिखाई दिया। अलकूज ने तुरंत उसे पकड़ लिया और फिर जोर-जाेर से चिल्‍लाकर आसपास के सभी लोगों को इकट्ठा कर लिया। अलकूज ने सभी को उस लालची और धोखेबाज बूढ़े की हरकत से बारे में बता दिया।   

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