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साँई कम्‍प्‍यूटर टायपिंग इंस्‍टीट्यूट गुलाबरा छिन्‍दवाड़ा म0प्र0 संचालक:- लकी श्रीवात्री मो0नां. 9098909565

created Dec 6th 2021, 02:52 by lovelesh shrivatri


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रूसी राष्‍ट्रपति व्‍लादिमीर पुतिन ने यूक्रेन सीमा पर भारी मात्रा मे रूसी फौज तैनात कर दी है। हमें पुतिन की योजनाओं के बारे में पता नही हैं। वे हमेंशा की तरह अपने आप में ही एक पहेली हैं। परन्‍तु यूक्रेन के बारे में दिए गए पुतिन के हालया बयान ने कीव, ब्रुसेल्‍स और वाशिंगटन के नेताओं को व्‍यथित कर दिया है, जिसमें उन्‍होंने दावा किया था कि यूक्रेन और रूस असल मे एक ही राष्‍ट्र हैं। पिछली बार जब पुतिन ने यूक्रेन सीमा पर सेना तैनात की थी, तो राष्‍ट्रपति जो बाइडन ने अपने रूसी समकक्ष के साथ इस साझेदारी को नाम दिया था- एक स्‍थाई और पूर्वानुमानित संबंध। बाइडन और उनकी टीम ने गत वर्ष जून में हुई बाइडन-पुतिन बैठक से पूर्व भी यही उम्‍मीद लगाई थी। बाइडन सरकार को अब यूक्रेन के साथ ज्‍यादा उप‍लब्धियों वाली विदेश नीति बनानी चाहिए। साफ तौर पर बाइडन के साथ पुतिन स्‍थाई और पूर्वानुमानित संबंध नहीं चाहते, क्‍योंकि वे अमरीका को रूस का सबसे बड़ा दुश्‍मन मानते हैं। उन्‍हें लगता है कि बाइडन सरकार इसलिए उनकी धारणा है कि दोनों देशो के बीच हमेंशा टकराव ही बना रहेगा। साल की शुरूआत में भी पुतिन अपने व्‍यवहार से सभी को चौंका चुकें हैं, जब उन्‍होंने यूक्रेन सीमा पर सेना तैनात की थी, तब बाइडन ने प्रतिक्रिया स्‍वरूप जेनेवा में एक उच्‍च स्‍तरीय सम्‍मेलन की मांग की थी, जिसमें शीतयुद्ध में भाग लेने वाली सारी सुपर शक्तियां भाग लें। इससे पुतिन को फायदा हुआ और उन्‍होंने जर्मनी में अपनी नाॅर्ड स्‍ट्रीम 2 गैस पाइपलाइन परियोजना की अनुमति ले ली। अमरीका-रूस तनाव का प्रभाव अमरीका-यूक्रेन के बीच गहरे संबंधों की महत्‍वाकांक्षा के रूप में परिलक्षित हो रहा है। अब अमरीका को रूस युक्रेन दोनों के साथ संबंधों के लिए नई विदेश नीति बनानी होगी। रूस के लिए बाइडन को ज्‍यादा कड़ी नीति बनानी होगी। सहयोग के साथ ही प्रतिबद्धताएं भी होनी चाहिए। ताकि सहयोग विफल होने पर अनिवार्य कार्रवाई की जा सकें। यूक्रेन सीमा पर मौजूदा संकट को देखते हुए बाइडन प्रशासन को चाहिए कि वे सार्वजनिक तोर पर यह बताएं कि अमरीका पूर्वी यूक्रेन में युद्ध खत्‍म करना चाहता है। अमरीका-रूस द्विपक्षीय वार्ता के जरिए यूक्रेन का भविष्‍य तय करने की रूस की मंशा पर भी विराम लग जाएगा। बाइडन, कांग्रेस और यूरोपीय सहयोगियों को भी अब इस बारे में सार्वजनिक तौर पर बोलना चाहिए, कि एक और रूसी आक्रमण का इंतजार करना चाहिए। रूस के आक्रामक रवैए के खिलाफ गंभीर व्‍यापक प्रतिबंध भी कारगर हो सकते हैं। ऐसा करने से पश्चिमी जगत को रूस के खिलाफ तुरंत कार्रवाई करनी होगी, अगर वह नया सैन्‍य आक्रमण करता है। मौजूदा प्रतिबंध मॉडल अपनाने होंगे। अगर रूस यूक्रेन के खिलाफ जंग जारी रखता है, तो हर साल एक नया प्रतिबंध लगना चाहिए। जहां तक यूक्रेन की बात है, बाइडन सरकार को एक अलग तरह की रणनीति अपनानी होगी। पहला, उन्‍हें अपने करीबी किसी अमरीकी राजदूत को यूक्रेन मे नियुक्‍त करना होगा।    

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