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BUDDHA ACADEMY TIKAMGARH (MP) || ☺ || ༺•|✤आपकी सफलता हमारा ध्‍येय✤|•༻

created Nov 21st, 11:09 by Vivek Sen


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हम में से कई लोग अकसर ये सोचते हैं कि उनके जीवन में कोई आएगा और उनके जीवन को बदल देगा। कुछ लोग खुद ही अपने जीवन को बदलने का प्रयास करते हैं। लेकिन उनकी कुछ कमजोरियां उन्‍हें आगे बढ़ने नहीं देती। वो उस कमी को जानते हैं लेकिन वो भी सोचते हैं कि कोई चमत्‍कार ही उनकी इस कमी को दूर कर सकता है।  
    आश्रम में आज फिर से तलवारबाजी सिखाई जा रही थी और रोज ही की तरह धीरेन्‍द्र अपने अंदर के डर के कारण तलवार नहीं चला पा रहा था। गुरु जी ने उसे बहुत बार समझाया कि जब तक अपने अंदर के डर को बाहर नहीं निकाल देता। तब तक तलवारबाजी नहीं कर सकता। लेकिन क्‍या स्‍वाभाव बदलना इतना ही आसान होता है। ऐसा नहीं था कि वह तलवारबाजी जानता नहीं था। गुरुजी ने उसे खुद देखा था जब वो अकेले में अभ्‍यास कर रहा था। बहुत ही बढ़िया ढंग से तलवार चला रहा था। लेकिन जैसे ही किसी से मुकाबला करवाया जाता वह तलवार चला पाया। धीरेन्‍द्र अपने गुरु का बहुत प्‍यारा शिष्‍य था। इसका कारण यह था कि वह हर काम में आगे था। बस अगर उसमें कोई कमी थी तो वो ये की वह अब तक मुकाबले में तलवार चलानी नहीं सीख पाया था।
    जब भी वह तलवार चलानी सीखने जाता तब-तब सामने वाले के हाथों में तलवार देखकर उसके पसीने छूट जाते। उसके हाथ कांपने लगते। एक दिन गुरु जी ने धीरेन्‍द्र को अकेले में अपनी कुटिया में बुलाया और बोले, बहुत प्रयास किया कि तुम तलवार चलानी सीख लो। लेकिन तुम अपने भय को अपने अंदर से निकाल नहीं पा रहे हो।
    गुरुदेव मैं खुद नहीं समझ पा रहा हूं कि ऐसा क्‍यों होता है। सामने वाले के हाथों में तलवार देख मुझे ऐसा लगता है जैसे वो अभी मेरा सर धड़ से अलग कर देगा। धीरेन्‍द्र ने अपनी समस्‍या बताते हुए गुरु जी से कहा मुझे पता है धीरेन्‍द्र इसीलिए आज मैंने एक बहुत बड़ा फैसला लिया है। इतना कहते हुए उन्‍होंने एक तलवार उठायी और धीरेन्‍द्र को दिखाते हुए बोले, ये जादुई तलवार है जो मुझे मेरे गुरुदेव ने दी थी। इस तलवार को चलाने वाला कभी भी हारता नहीं है। तुम मेरे प्रिय शिष्‍य हो इसलिए आज मैं यह तलवार तुम्‍हें सौंप रहा हूं।

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