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सॉंई टायपिंग इंस्‍टीट्यूट गुलाबरा छिन्‍दवाड़ा म0प्र0 सीपीसीटी न्‍यू बैच प्रारंभ संचालक:- लकी श्रीवात्री मो0नं. 9098909565

created Jun 16th, 10:20 by vinita yadav


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मां ऐसा सागर है मां ऐसा रूप हैं। जिसमें तैरने पर आनंद की अनुभूति होती है। जिस व्‍यक्ति को मां मिल जाती है। उसकी खुशियों की सीमा नहीं होती है। मां की ममता में इतनी शक्ति होती है कि कोई हमारा सबसे बड़ा तथा प्रथम गुरू मां को ही कहा गया है। मां हमारे हम रूप को स्‍वीकार करती है। एक बच्‍चे के लिए मां ही सब कुछ होती है। जिस व्‍यक्ति के पास मां नहीं होती हैं। उस व्‍यक्ति के पास सब कुछ होते हुए भी कुछ नहीं होता है। अगर कोई हमारी मां को कुछ भला-बुरा कहे तो हमें अच्‍छा नहीं लगता है क्‍योंकि वह हमारी मां हैं। अर्थात् किसी की भी मां को बुरा कहने से हमकों और उनके बच्‍चों को भी बुरा लगता है। क्‍योंकि वो मां है। मां वो होती है। जो अपने बच्‍चों को गलत राह पर चलने की शिक्षा नहीं देती। सही और सत्‍य की राह दिखाती है। मां अपने बच्‍चें के लिए खुद भूखी रहकर अपने बच्‍चों को खिलाती है। सभी वेद-पुराणों शास्‍त्रों में मां का स्‍थान सर्वोपरि हैं। मां वो है जो बच्‍चे के हर सपने को पूरा करती हैं। मां कहने से जो भाव जो अनुभव पैदा होता है। वो बाकी स्‍त्री कहने से नहीं आता है। जगत की सारी स्त्रियों को मातृशक्ति का ही रूप माना गया है। मां की ममता अमृत के समान होती है। अगर मां अपने बच्‍चों को डॉंटती-मारती है तो कुछ अच्‍छा सिखाने और सही राह पर चलाने के लिए मां बच्‍चों पर बहुत बड़ा कर्ज करती है। परन्‍तु कभी बताती या जताती नहीं है। मां गरीब क्‍यों हो? परन्‍तु अपने बच्‍चों की सारी पूर्ति, आवश्‍यकताओं को पूरी करती है। हम मां का कर्ज इस जन्‍म में तो क्‍या किसी भी जन्‍म में पूरा नहीं कर सकते हैं।  
मां बच्‍चों के सारे दु:ख दुर करती है। अर्थात् उसे खुद ही सहती है। मां वह गुलशन है जो सारे घर को महका देती है। अर्थात् मां है तो सब कुछ हैै मां नहीं है तो कुछ भी नहीं है।  
मां के आशीर्वाद से हम संसार रूपी सागर को पार कर सकते है। क्‍योंकि मां जगत जननी दुर्गामाता के समान होती है। मां के आशीर्वाद दे देने से अपना कल्‍याण हो जाता है। मां का अपमान करके सम्‍मान करना चाहिए।  
मां है तो सब कुछ है। मां के बिना कुछ भी नहीं हैं।      

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