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BUDDHA ACADEMY TIKAMGARH (MP) || ☺ || ༺•|✤आपकी सफलता हमारा ध्‍येय✤|•༻

created Feb 27th, 06:43 by MY HOME


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अमेरिका के राष्‍ट्रपति डॉनल्‍ड ट्रंप की पहली भारत यात्रा इस लिहाज से उल्‍लेखनीय रही कि उन्‍होंने विवादति ट्वीट करने से परहेज किया, पहले से तय स्क्रिप्‍ट पर चले और न्‍यूनतम एजेंडा हासिल कर लिया। यात्रा के दौरान तीन अरब डॉलर का रक्षा सौदा और काफी दिखावा होने के साथ इस साल आगे चलकर एक व्‍यापार सौदे का वादा भी किया गया। यह अलग बात है कि औपचारिक वार्ता के बाद व्‍यापार सौदे को लेकर किसी भी प्रगति की घोषण नहीं हुई। दुनिया के सर्वाधिक ताकतवर शख्‍स से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को मजबूत नेता, मुश्किल वार्ताकार और बेहद धार्मिक व्‍यक्ति का खिताब भी मिला। गहरी निजी कूटनीति दोनों नेताओं की पंसदीदा शैली रही है और यह यात्रा भी दोनों देशों के बीच सद्भावना का माहौल बनाने में सफल रही है।
    दोनों देशों ने ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग समेत तीन सहमति-पत्रों पर हस्‍ताक्षर किए। दोनों देशों ने आपसी संबंधों को समग्र वैश्विक स्‍तर पर सम्मिलित हित की मंशा रखते हैं। भले ही इस नए रिश्‍ते की रूपरेखा परिभाषित नहीं की गई है, लेकिन इससे ब्‍लू डॉट नेटवर्क में भारत की करीबी भागीदारी के संकेत जरूर मिलते हैं अमेरिका ने चीन की बेल्‍ट ऐंड रोड इनिशिएटिव योजना के जवाब में ब्‍लू डॉट नेटवर्क की संकल्‍पना रखी है।
    हालांकि काफी खर्चीले दिखावे के बावजूद भारत के लिए इस यात्रा के नतीजे बहुत ठोस नहीं रहे हैं। पहली बात, ट्रंप ने पाकिस्‍तान के प्रधानमंत्री इमरान खान और चीन के राष्‍ट्रपति शी चिनफिंग के साथ अपने अच्‍छे संबंधों का उल्‍लेख किया। उन्‍होंने चीन के साथ सीमित कारोबारी सौदे का जिक्र करते हुए कहा कि वह इसे भारत के साथ सौदे का एक प्रारूप बनाना चाहते हैं।  
    ट्रंप के संबोधन में अमेरिका एवं भारत के बीच 16.9 अरब डॉलर के व्‍यापार घाटे का उल्‍लेख नहीं हुआ। दोनों ही पक्ष कृषि उत्‍पादों, मेडिकल उपकरणों, डिजिटल व्‍यापार और नए शुल्‍कों को लेकर बंटे रहे और ट्रंप ने इस बात को दोहराया कि भारत के आयात शुल्‍क काफी अधिक हैं। तीसरी बात, उन्‍होंने अमेरिका में भारतीय निवेश बढ़ाने की बात कर भारतीय अधिकारियों को शायद निराश कर दिया होगा जो अमेरिका से प्रत्‍यक्ष विदेशी निवेश बढने की उम्‍मीद लगाए बैठे थे।  
    कुल मिलाकर उनके इस दौरे को पूरी तरह नाकाम नहीं कहा जा सकता है। लेकिन राष्‍ट्रपति भवन में सलामी गारद, अहमदाबाद के कार्यक्रम और रात्रिभोज को उल्‍लेखनीय सफलता नहीं माना जा सकता है। कम से कम उनके इस दौरे ने यह सुनिश्चित किया है कि भारत अपने हितों की रक्षा करने में सक्षम है और सभी अहम व्‍यापार वार्ताएं ठंडे बस्‍ते में नहीं चली गई हैं। एक स्थिर अर्थव्‍यवस्‍था में इसे उम्‍मीद का संकेत माना जा सकता है।  

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