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सॉंई टायपिंग इंस्‍टीट्यूट गुलाबरा छिन्‍दवाड़ा म0प्र0 सीपीसीटी न्‍यू बैच प्रारंभ संचालक:- लकी श्रीवात्री मो0नं. 9098909565

created Feb 27th, 06:36 by rajni shrivatri


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एक गांव में एक सिद्ध संत पधारे। गांववालो ने उनका खूब स्‍वागत किया। सभी ने बड़े ध्‍यान से उनका प्रवचन सुना संत बहुत खूश हुए। उन्‍होंने सभी भाइचारे प्रेमपूर्वक रहने की सलाह दी। लेकिन चलते-चलते उन्‍होंने गांववालो से कह दिया कि तुम सब तितर-वितर हो जाओ। वे समझ  नहीं पाए थे कि संत ने उन्‍हें ऐसी अटपटी बात क्‍यों कही। जबकि ठीक विपरीत पास के गांववालों ने संत का खूब निरादर किया था। लेकिन संत ने उन्‍हें फिर भी साथ रहने का आर्शीर्वाद दिया। जब संत गांव सीमा तब जाने लगे तब एक सदस्‍य ने बड़ी हिम्‍मत करके कहां कि बाबा आखिर हमने क्‍या बिगाड़ा था। जो आपने हमें इतनी मनहूस बात कह दी।  
बाबा ने कहां क्‍योंकि तुम सभी अच्‍छे हो तुम सभी में अच्‍छाई का तेज प्रकाश है। तुम जाह भी जाओगे अच्‍छाई का तेज प्रकाश फेलेगा। एकता भाईचारे की भावना का संचार होगा। पड़ोसी गांव के लोग तुम्‍हारी तरह नहीं है। वे जहां भी जाएगे नफरत आपसी फूट घृणा के बीज बोऐंगे इसलिए मैंने उन्‍हें एक ही जगह एकत्रित होने का कहा। संत का सवाल सुनकर गांव वाले दंग रह गए और  उन्‍होंने आदर से संत के चरणों में शीश झुका दिया।  

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