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बंसोड टायपिंग इंस्‍टीट्यूट गुलाबरा, छिन्‍दवाड़ा मो.न.8982805777 सीपीसीटी न्‍यू बैच प्रांरभ

created Feb 25th, 15:04 by sachin bansod


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मथुरा के पास एक छोटे से गांव में एक किसान परिवार रहता था जो खेती-बाड़ी करके अपना जीवन यापन करता था। उस किसान का एक बेटा था जिसका नाम सोहन था। वह भी खेती बाड़ी में अपने पिताजी का साथ देता था। किसान परिवार हर वर्ष आलू की फसल उगाते थे। पिताजी पूरा खेत जोतते थे। सोहन की मां और सोहन मिलकर पतली-पतली नालियों की कतार में बीज डालते थे और फिर उसके ऊपर खाद का मिश्रण डालते थे। खाद डालने के बाद उन नालियों को मिट्टी से भर दिया जाता था। लगातार देखभाल और सिंचाई करने के बाद वह बीज बड़े-बड़े आलू बन जाते थे। आलू की खेती के दौरान सोहन के पिता ने सोहन को एक ज्ञान की बात बताई सोहन तुमने देखा कि कैसे यह छोटा सा बीज कितनी जल्‍दी आलू बन जाता है। फिर आलू से हम तरह-तरह के भोजन बनाते हैं। कुछ इसी तरह से हमारे रिश्‍ते नाते भी पक कर तैयार होते हैं। हमारा प्रत्येक इमोशन  हमारी प्रत्‍येक बात एक बीज की तरह होती है, जो समय के साथ परिपक्‍व होती जाती है और अलग-अलग परिस्‍थतियां उन बीजों के लिए खाद की तरह काम करती है।

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