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BUDDHA ACADEMY TIKAMGARH (MP) || ☺ || ༺•|✤आपकी सफलता हमारा ध्‍येय✤|•༻

created Feb 25th, 11:49 by ddayal2004


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ऐसा लगता है कि जलवायु परिवर्तन के लिए मानव इतिहास में इससे बदतर समय नहीं हो सकता था। यह साफ है कि अब स्थितियां हाथ से निकल रही हैं। हर साल नया वर्ष शुरू होने तक हमें बताया जाता है कि यह सबसे गर्म वर्ष है। इसके बाद नया रिकॉर्ड टूट जाता है। जंगलों में आग से लेकर तूफानों के बार-बार आने और उनकी तीव्रता में इजाफा होने, अत्‍यधिक ठंडी लहारें और अत्‍यधिक गर्मी जैसी सभी स्थितियां बदतर होती जा रही हैं। लेकिन हमें इन हालात को काबू में करना होगा। असल यह है कि जलवायु परिवर्तन वास्‍तविक है, यह घटित हो रहा है और यह हमारे विश्‍व के गरीबों को और हाशिये पर ला रहा है। भूमि पर काम करने वाले और पानी का इस्‍तेमाल करने वाले किसान, पशुपालक आदि सबसे अधिक प्रभावित हो रहे हैं। वे जलवायु परिवर्तन के पीड़ित हैं। दुनिया के गरीबों की इस समस्‍या को पैदा करने में कोई भूमिका नहीं है। लेकिन हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि उनकी तकलीफ हमारी दुनिया को असुरक्षित बना देगी। हालांकि उनकी तकलीफ और बढ़ने जा रही है। यही वजह है कि हमें तत्‍काल इस पर काम करने की जरूरत है।
    इनमें से प्रत्‍येक प्राकृतिक आपदा नहीं है। ये आपदाएं विकास लाभ को छीन लेती हैं, जिनके लिए सरकार इतनी अधिक मेहनत करती हैं। घर और अन्‍य व्‍यक्तिगत संपत्तियां बह जाती हैं, सड़क एवं बुनियादी ढांचा नष्‍ट हो जाता है और सभी को फिर से बनाना पड़ता है। यह भी साफ है कि बाढ़ या सूखे का केवल जलवायु परिवर्तन या मौसम में बदलाव से ही लेना-देना नहीं है। हकीकत यह है कि सूखे का संबंध जल संसाधनों के कुप्रबंधन से भी है, जहां पर्याप्‍त बारिश का पानी फिर से जमीन में नहीं डाला जा रहा है या जल का अकुशल एवं असमान उपयोग हो रहा है। बाढ़ की वजह जल निकासी की योजना नहीं बना पाना, ढालू क्षेत्र में वनों की सुरक्षा की चिंता नहीं करना या बाढ़ग्रस्‍त क्षेत्र का निर्माण और उसे नष्‍ट करना आदि शामिल हैं। पहले से ही कुप्रबंधित भूमि और कंगाल राजनीति के अलावा खराब मौसम भी हालात को विकट बनाता है।
    मैं इसे दोहरी मार मानती हूं। पहले से ही गर्म और जल के अभाव वाली जमीन के लिए उच्‍च तापमान स्थितियों को विकराल बना रहा है। हरे-भरे क्षेत्र का अभाव मरुस्‍थलीकरण की स्थितियां बढ़ाता है। वहीं भूमिजल के अतिदोहन और सिंचाई की अच्‍छी पद्धतियों को नहीं अपनाए जाने से भूमि खराब होती है। इसके अलावा हम जिस तरह से खेती कर रहे हैं और हम जो खा रहे हैं, उसकी वजह से भूमि का इस्‍तेमाल बढ़ रहा है। और हम जिस तरह से उगा रहे हैं, उससे वह उत्‍पादित हो रहा है, जो हम खाते हैं।
    जलवायु परिवर्तन और भूमि पर आईपीसीसी की 2019 की रिपोर्ट में यह सही कहा गया है कि आधुनिक कृषि में रसायनों का इस्‍तेमाल बढ़ा है और इसका औद्यो‍गीकरण बढ़ा है। इससे ग्रीन हाउस गैसों का उत्‍सर्जन बढ़ रहा है। रिपोर्ट में खानपान में बदलाव की जरूरत बताई गई है जिससे हम पृथ्‍वी पर आसानी से अपना सफर पूरा कर सकेंगे।
     

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