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बंसोड टायपिंग इन्‍स्‍टीट्यूट शॉप नं. 42 आनंद हॉस्टिपटल के सामने, संचालक- सचिन बंसोड मो.नं.

created Feb 25th, 01:49 by Sawan Ivnati


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श्याम सुंदर नाम का एक नवयुवक रायपुर शहर में रहता था और एक कंपनी में नौकरी करता था। उसके गांव के मित्र जब काम के सिलसिले में शहर आते तो उसके घर जरूर आते। एक बार मनोहर लाल नाम का एक मित्र उसके घर आया। मित्र को देखकर श्‍याम भौहें सिकोड़ने लगा। यह सब देखकर उसकी पत्‍नी ने कारण पूछा। उसने अपनी पत्‍नी को कहा कि यह मेरा मित्र बहुत ही कंजूस है, जब भी आता मुझसे खूब खर्चे करवाता है। किन्‍तु अपने जेब से एक फूटी कौड़ी कभी नहीं निकालता। यह सुनकर उसकी पत्‍नी ने कहा कि आप फिक्र करें, मैं आपको एक उपाय बताती हूं।
अब श्‍याम सुंदर अपने कंजूस मित्र को लेकर शहर भ्रमण के लिए निकल गया। वह मित्र उसकी कंजूसी से तंग चुका था। इस बार उस मित्र ने उसे सबक सिखाने का सोचा। वह अपने कंजूस मित्र को बाजार ले गया और कहा आपको जो भी खाने की इच्‍छा है बता सकते हैं , मैं आपके लिए ले दूंगा। वो एक होटल में गए श्‍याम ने होटल मालिक से पूछा भोजन कैसा है? होटल के मालिक ने जवाब दिया मिठाई की तरह स्वादिष्‍ट है महाशय। मित्र ने कहा तो चलो मिठाई ही लेते हैं। दोनों मिठाई की दुकान पर गए, मित्र ने पूछा मिठाइयां कैसी है? मिठाई बेचने वाले ने जवाब दिया  मधु (शहद ) की तरह मीठी है। श्‍याम ने कहा तो चलो मधु ही ले लेते हैं। श्‍याम कंजूस मित्र को शहद बेचने वाले के पास ले गया। उसने शहद बेचने वाले से पूछा शहद कैसा है? शहद बेचने वाले ने जवाब दिया  जल की तरह शुद्ध  है। तब श्‍याम ने मनोहर से कहा  मैं तुम्‍हें सबसे शुद्ध भोजन दूंगा। उसने कंजूस मित्र को भोजन के स्‍थान पर पानी से भरे हुए अनेक घड़े प्रदान किए। कंजूस मित्र को अपनी गलती का अहसास हो गया, है समझ गया कि यह सब उसे सबक सिखाने के लिए किया जा रहा है। उसने हाथ जोड़कर श्‍याम से माफी मांगी , श्‍याम ने भी उसे अपनी बाहों में भर लिया। दोनों हंसी– खुशी वापस घर आए। श्‍याम की पत्‍नी ने मनोहर के लिए स्‍वादिष्‍ट भोजन तैयार किया भोजन उपरांत वह वापस गांव लौट आया। इसके बाद उसने अपनी कंजूसी की आदत हमेशा के लिए छोड़ दी।
 

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