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HINDI STENOGRAPHER

created Feb 24th, 16:49 by vijay


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माननीय सभापति जी, कृषि मंत्री जी ने इस सदन में जो मांग रखी है उसका मैं समर्थन करता हूं और बधाई देता हूं कि इस वर्ष के बजट में उन्होंंने कृषि के लिए काफी अधिक राशि रखी है हमारा देश एक कृषि प्रधान देश माना जाता है लेकिन खेती और किसानों की ओर जितना ध्यान दिया जाना था पिछले सालों में वह नहीं दिया गया है। कृषि के प्रति हमारा दृष्टिकोण है उस के कारण कृषि की स्थिति ज्यों की त्यों रही है। अधिक राशि रखने से ही यह समस्या हल होने वाली नहीं है इस का सही और पूरा इस्‍तेमाल हो इस ओर भी हमें ध्यान देना चाहिए। स्थिति यह है कि किसान जो कि अन्न पैदा करने वाला है वही रात को भूखा सोता है। कृषि की इतने सालों बाद भी यही स्थिति है। इसको समाप्त करने के लिए हमें शीघ्र ही नीति में कुछ सुधार करना पड़ेगा। ऐसी स्थिति अधिक समय तक नहीं चलनी चाहिए। मैं माननीय कृषि मंत्री से प्रार्थना करता हूं कि इस बारे में तेजी से काम हो यदि सरकार कृषि की स्थिति में सुधार लाना चाहती है तो इसकी पैदावार पर जो खर्च आता है वह किसान को मिलना चाहिए। इसके बिना खेती में सुधार नहीं होगा। इस बारे में सबसे पहले जो करने की बात है वह है कृषि पर आने वाला खर्च किसान को मिले।
कृषि के विकास में सिंचाई का महत्वपूर्ण स्थान है। सिंचाई के साधन उपलब्ध होने के कारण हमें जितनी पैदावार मिलनी चाहिए उतनी नहीं मिल पाती है। हमारी अधिकतर खेती वर्षा पर ही निर्भर करती है। यदि समय पर वर्षा नहीं होती है तो पैदावार नहीं होती है सिंचाई से हम अधिक अन्न पैदा कर सकते है। इसलिए मैं निवेदन करना चाहता हूं कि सिंचाई की जितनी भी सुविधा हो हमें किसानों को देनी चाहिए। बजट में जो रकम रखी गई है वह और अधिक होनी चाहिए।  
महोदय, बाढ़ भी हमारे देश में एक समस्या है। इतने बड़े देश में एक भाग में सूखा पड़ता और दूसरे भाग में बाढ़ आती है बाढ़ को रोकने के सारे उपाय बेकार हो जाते है। इससे भी खेती को नुकसान होता है और पैदावार पर असर पड़ता है  हमारे खेतीहर मजदूरों कि बिना काम के रहना पड़ता है और उनके परिवारों की कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। मैं कहना चाहता हूं कि सरकार इस ओर ध्‍यान दे।
 

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