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SAKSHI COMPUTERS MAIN ROAD GULABRA CHHINDWARA (M.P)

created Feb 24th, 10:08 by RADHARAMAN THAKUR


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 अब परीक्षा अंको की मारकाट में तब्‍दील हो चुकी है। जैसे-जैसे प्रतिस्‍पर्धा बढ़ रही है, विद्यार्थियों से लेकर अभिभावकों तक दोनों में अंको का खौफ हावी होता जा रहा है, पर जिंदगी तो अच्‍छे अंकों के बिना भी बेहतर हो सकती है।  माता-पिता चाहते है कि उनका बच्‍चा टॉप करें, उनका नाम रोशन करें। एक अभिभावक चाहेगा ही, इसमें गलत कुछ नहीं है। गलत तब है, जब अंको की यह भूख बच्‍चे की क्षमता से आगे निकल जाए। अगर पता है कि बच्‍चा ज्‍यादा अंक नहीं ला पाएगा, फिर भी दबाव बनाते है तो यह बहुत ही खतरनाक है। बच्‍चा क्‍या बनना चाहता है, उसे क्‍या पसंद है, वह क्‍या करना चाहता है, माता-पिता सिर्फ इसी पर अपना फोकस करें तो देखिए नतीजे, आपकी उम्‍मीदों से भी कहीं बेहतर आएंगें।
अंको का संबंध शैक्षणिक प्रदर्शन से जरूर है हो सकता है अच्‍छे अंकों से आपको किसी अच्‍छे संस्‍थान में दाखिला मिल जाए, लेकिन यह समझना भी जरूरी है कि इसका संबंध आपकी प्रतिभा से बिल्‍कुल भी नहीं है। इसके मायने यह है कि कम अंक आपकी इस प्रतिभा को नहीं रोक सकते, जिसके लिए आप बने है। दुनिया में सभी सफल महान लोगों को देखिए। कोई भी ऐसा नहीं कि जिसने टॉप किया है बल्कि  कुछ लोग तो ऐसे भी है जो अपनी पढ़ाई ही पूरी नहीं कर सके, फिर भी दुनिया के अमीरों की सूची में शीर्ष में आए। ऐसा इसलिए कि इनका लक्ष्‍य अंकों पर नहीं था, उनके अपने गोल पर था। इसलिए अच्‍छे अंक लाने की कोशिश जरूर करें, लेकिन यही अंतिम लक्ष्‍य हो।  
हर बच्‍चा पढ़ने में अच्‍छा हो यह जरूरी नहीं है। हर बच्‍चा अच्‍छे अंक ला सके, यह भी जरूरी नहीं है। हर बच्‍चा आई टी आई, मेडिकल एग्‍जाम या इसी तरह की एग्‍जाम क्रैक कर सके, यह भी जरूरी नहीं, तो ऐसे में बच्‍चे क्‍या करें ?  ध्‍यान रहे ईश्‍वर ने हर व्‍यक्ति को एक प्रतिभा क्षमता के साथ पैदा किया है, जो अंकों पर आधारित नहीं होती। बस, अपनी उस क्षमता को पहचानकर आगे बढ़ने की जरूरत है। शुरूआती परीक्षा का परिणाम आपके भविष्‍य को निर्धारित नहीं करता इसलिए कैसे भी अंक आए, आप क्‍या करना चाहते हैं, इस पर पूरा फोकस होना चाहिए।

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