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बंसोड कम्‍प्‍यूटर टायपिंग इन्‍स्‍टीट्यूट छिन्‍दवाड़ा मो0नं0 8982805777 प्रो.सचिन बंसोड (CPCT, DCA, PGDCA) प्रवेश प्रारंभ CPCT- TEST

created Aug 6th, 02:39 by neetu bhannare


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कतई संदेह नहीं कि महंगाई पर नियंत्रण जरूरी है और भारतीय रिजर्व बैंक ने इसी के अनुरूप मौद्रिक नीति में परिवर्तन किए हैं। खास यह भी है कि मौद्रिक नीति के ऐलान से पहले रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास ने वैश्विक स्‍तर पर बढ़ती महंगाई का हवाला दिया। महंगाई को लेकर तो गवर्नर की चिंता नई है और उनके द्वारा किया गया उपाय। उन्‍होंने रेपो रेट को 0.50 फीसदी बढ़ाने का ऐलान किया है, यानी भारत में रेपो रेट अब 4.90 से बढ़कर 5.40 फीसदी पर पहुंच गया है। रेपो रेट बढ़ाने का सीधा असर यह होगा कि बाजार में नकदी का अभाव होगा, खरीद-बिक्री पर असर पड़ेगा। मांग कम और आपूर्ति ज्‍यादा रहेगी, तो कीमतें घटेंगी। यह बाजार में धन की तरलता घटाने के लिए किया जाने वाला पुराना उपाय है। बाजार में तेजी लाने के लिए रेपो रेट घटाया जाता है और तेजी कम करने के लिए रेपो रेट बढ़ाया जाता है। बहरहाल, कुछ दिनों से इसकी संभावना थी। सरकार के पास कोई खास उपाय नहीं है, क्‍योंकि उसका ज्‍यादा ध्‍यान राजस्‍व पर है, ताकि वित्‍तीय घाटा ज्‍यादा बढ़ने पाए। पिछले दिनों दैनिक जरूरत की चीजों पर जीएसटी लगाकर या बढ़ाकर उसने अपनी कमाई बढ़ाने का उपाय किया है, अत: महंगाई घटाने की जिम्‍मेदारी भारतीय रिजर्व बैंक पर पड़ी है। वैसे बाजार में कुल मिलाकर खुशी है। शुक्रवार को मौद्रिक समीक्षा नीति की घोषणा से पहले ही शेयर बाजार मजबूती के साथ खुले। बीएसई का 30 शेयरों वाला प्रमुख संवेदी सूचकांक सेंसेक्‍स 122 अंकों के फायदे के साथ खुला। कमोबेश यही स्थिति निफ्टी में भी रही। दरअसल, बढ़ती महंगाई में ज्‍यादातर कंपनियां अपना फायदा देख रही हैं। रेपो रेट बढ़ने के बावजूद शेयर बाजार में उछाल की एक वजह यह भी है कि बाजार आश्‍वस्‍त हैं। भारतीय अर्थव्‍यवस्‍था व्‍यवस्‍था ऊंची मुद्रास्‍फीति से जूझ रही है और इसे नियंत्रण में लाना जरूरी है, लेकिन क्‍या इसमें रिजर्व बैंक को कामयाबी मिलेगी? कर्जमाफी और बड़ी कंपनियों को मिल रही राहत का फायदा क्‍या आम लोगों को मिल पा रहा है? अनेक देशी-विदेशी बड़ी कंपनियों से राजस्‍व की कमजोर उगाही को लेकर भी शिकायतें हैं। ऐसे में, एक सवाल यह भी है कि रेपो रेट में बढ़ोतरी से आम लोगों को कितना फायदा होगा? क्‍या रेपो रेट को और बढ़ाने की जरूरत पड़ेगी? फिलहाल भारतीय रिजर्व बैंक ने वित्‍त वर्ष 2022-23 के लिए मुद्रास्‍फीति अनुमान को 6.7 प्रतिशत पर कायम रखा है। आंकड़े कुछ भी कहें, लेकिन जमीनी स्‍तर पर महंगाई की चुभन कुछ ज्यादा ही है।  
आम आदमी के लिए दोतरफा परेशानी है, क्‍योंकि रेपो रेट में वृद्धि से कर्ज महंगा होना तय है। होम लोन, ऑटो लोन, पर्सनल लोन की किस्‍तों में और इजाफा होगा।  

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