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सॉंई टायपिंग इंस्‍टीट्यूट गुलाबरा छिन्‍दवाड़ा म0प्र0 सीपीसीटी न्‍यू बैच प्रारंभ संचालक:- लकी श्रीवात्री मो0नं. 9098909565

created Feb 22nd, 14:10 by lucky shrivatri


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बाज वो पक्षी है जिसकी बचपन से बड़ी मुश्किल ट्रेनिग होती है, आमतौर पर पक्षियों के बच्‍चे पैदा होने के बाद कई दिन रोटी के लिए चिचियाते रहते है। कम से कम एक या दो महीने तक पक्षियों के बच्‍चे खाने के लिए आपनी मां पर निर्भर होते है लेकिन बाज के बच्‍चों का बिलकुल उलट होता है।  
पैदा होन के के महज कुछ ही दिनों बाद ट्रेनिंग का पहला पड़ाव शुरू हो जाता है जिसमें मादा बाज अपने बच्‍चे के लिए खाना लेकर आती है लेकिन वो खाना सीधा बच्‍चे के मुंह में नहीं डालती बल्कि अपने घोसले से कुछ दूरी पर खड़ी हो जाती है और खाना उतनी ही दूरी से उस चूजें को दिखाती है। अब बच्‍चा भूखा होता है और उसे खाने की जरूरत होती है इसलिए चूजे को अपना पूरा जोर लगाकर संघर्ष करते हुए घोसले से बाहर निकलना पड़ता है। गिरते पड़ते उसे अपनी मां की तरफ जाना पड़ता है, जहां खाना पड़ा है। इस संघर्ष में वो चूजा जख्‍मी भी हो जाता है, लेकिन मादा बाज का दिल नहीं पिघलता। वो तब तक घोंसले से दूर खड़ी रहती है जब तक चूजा उस तक नहीं पहुंच जाता।  
ट्रेनिंग के दुसरे पड़ाव में कुछ दिनों बाद मादा बाज अपने बच्‍चे को पंजों में दबाकर आसमान में 10 से 12 किलोमीटर ऊंचा ले जाती है और फिर इतनी ऊंचाई से चूजे को फेंक देती है। ये उस चूजे की सबसे कठिन परीक्षा होती है। जैसे ही मादा बाज अपने चूजे को इतनी ऊंचाई से नीचे फेंकती है, बच्‍चा तो जैसे लोट पोट होते हुए नीचे गिरने लगता है जब वह जमीन से करीब एक हजार मीटर की दूरी पर होता है ताे घबराहट में अपने पंख फैलाने शुरू करता है लेकिन तभी मादा बाज तेजी से उस चूजे को हवा में ही अपने पंजो में दबाती है और सुरक्षित जमीन पर पटक देती है।  
मादा बाज ऐसा तब तक करती रहती है जब तक कि वो चूजा अच्‍छी तरह उड़ना ना सीख ले। इस तरह एक बाज की बचपन में ट्रेनिंग शुरू होती है ताकि वह इस खतरों से भरी जिन्‍दगी में भी सबसे शक्तिशाली रहे। अपने इसी सख्‍त प्रशिक्षण की वजह से एक बाज अपने से दोगुने वजनी शिकार को भी उठा कर ले जा सकता है, बाज की इस जिन्‍दगी से हमें भी बहुत बड़ी सीख मिलती है।
हम सभी अपने बच्‍चो को बहुत प्‍यार करते है लेकिन हमेशा याद रहे कि प्‍यार के साथ उन्‍हें जिन्‍दगी की मुश्किलों का सामना करना भी सिखाये ताकि वह अपना खुद का व्‍यक्तित्‍व बना सके और इस दुनिया को अपनी प्रतिभा भी दिखा सकें।
अपने बच्‍चो को सिखाईये कि जिन्‍दगी में अपने लिए लड़ना कोई गलत बात नही। उन्‍हें बताये कि जिन्‍दगी का दूसरा नाम संघर्ष है और हर पड़ाव पर उन्‍हें कुछ हासिल करने के लिए संघर्ष करना ही  पड़ेगा। अगर आप उन्‍हें सब कुछ थाली में परोस कर दे देंगे तो उन्‍हे मेहनत का मूल्‍य पता ही नहीं चलेगा जिस कारण वह जिन्‍दगी में आगे नहीं बढ़ पाएंगे।    
 

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